हिमाचल में 2 नये हवाई अड्डों और 9 हेलीपैड की उड़ान योजना में पहचान, क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करेगी सरकार

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने राज्यसभा को बताया कि हिमाचल प्रदेश में क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (आरसीएस-उड़ान) के तहत उड़ानें संचालित करने के लिए दो हवाई अड्डों और नौ हेलीपैड की पहचान की गई है। इससे राज्य के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों को हवाई संपर्क उपलब्ध कराया जा सकेगा।

सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने बताया कि उड़ान योजना ने भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इस योजना के जरिए द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों तथा दूरदराज़ के क्षेत्रों तक हवाई संपर्क का विस्तार किया गया है, जहां बुनियादी ढांचा होने के बावजूद कनेक्टिविटी एक बड़ी चुनौती रही है।

योजना को देश में दिया जा रहा विस्तार

मंत्री ने कहा कि उड़ान योजना के तहत अब तक 657 क्षेत्रीय हवाई मार्ग शुरू किए जा चुके हैं, जिन पर करीब 1.59 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की है। उन्होंने इस योजना के विस्तार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार देश में और अधिक हवाई अड्डे खोलने की योजना बना रही है, इसलिए उड़ान योजना को आगे बढ़ाना अनिवार्य है।

हिमाचल को विशेष लाभ

राममोहन नायडू ने बताया कि विस्तारित उड़ान योजना में हिमाचल प्रदेश और शिमला को भी शामिल किया गया है। राज्य में आरसीएस उड़ानों के विकास और संचालन के लिए दो हवाई अड्डों और नौ हेलीपैड की पहचान की गई है। इसके तहत शिमला, कुल्लू, रामपुर (हेलीपोर्ट), मंडी (हेलीपोर्ट), रेकोंग पेओ (हेलीपोर्ट) और संजौली (हेलीपोर्ट) को जोड़ने वाले कुल 38 आरसीएस मार्ग चालू किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में हवाई अड्डे स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हवाई संपर्क की मांग काफी अधिक है क्योंकि इससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने योजना का विस्तार हवाई अड्डों के साथ-साथ हेलीपैड और हेलीपोर्ट निर्माण तक किया है।

हेलीपैड निर्माण पर सहायता

मंत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में नौ स्थानों पर हेलीपैड बनाए जाने हैं। प्रति हेलीपैड औसतन 13 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है, जो केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली बजटीय सहायता के तहत वहन किया जाएगा।

उड़ान योजना की उपलब्धियां

अपने लिखित उत्तर में मंत्री ने बताया कि 20 जनवरी 2026 तक उड़ान योजना के तहत 657 आरसीएस मार्ग चालू किए जा चुके हैं, जो 93 ऐसे हवाई अड्डों को जोड़ते हैं जहां पहले हवाई सेवाएं नहीं थीं या बेहद सीमित थीं। इनमें 15 हेलीपोर्ट और दो वाटर एयरड्रोम भी शामिल हैं। अब तक 3.36 लाख आरसीएस उड़ानों के माध्यम से 1.60 करोड़ से अधिक यात्रियों को लाभ मिला है।

शिमला मार्गों पर उड़ान सेवाएं

मंत्री ने बताया कि एलायंस एयर ने उड़ान योजना के तहत शिमला-दिल्ली-शिमला और शिमला-अमृतसर-शिमला मार्गों पर एटीआर-42 विमानों से सेवाएं संचालित की थीं। हालांकि, तीन वर्ष की व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफ) अवधि पूरी होने के बाद दिल्ली मार्ग पर 16 अक्टूबर 2025 से परिचालन बंद कर दिया गया। अमृतसर मार्ग भी विमानों की कमी के कारण 17 अक्टूबर 2025 से बंद हो गया।

उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी निविदा दौर में शिमला हवाई अड्डे से जुड़े आरसीएस मार्गों के लिए कोई एयरलाइन वैध बोली प्रस्तुत करती है, तो उड़ान योजना के प्रावधानों के अनुसार उस पर विचार किया जाएगा।

अगले 10 वर्षों की योजना

राममोहन नायडू ने बताया कि सरकार ने संशोधित उड़ान योजना के तहत अगले 10 वर्षों में देशभर में 120 नए गंतव्यों तक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने और लगभग 4 करोड़ यात्रियों को हवाई सेवा उपलब्ध कराने की घोषणा की है, जिसमें पहाड़ी, उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

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