(दिल्ली): नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने सोमवार को कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण की यात्रा में देश के युवा केवल दर्शक नहीं होंगे, बल्कि इसके अभिनेता, निर्माता और निर्देशक की भूमिका भी निभाएंगे। उन्होंने युवाओं से आत्म-अनुशासन, टीम भावना और राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति समर्पण अपनाने का आह्वान किया।
यहां राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटों की एक सभा को संबोधित करते हुए नौसेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी संगठन या राष्ट्र का विकास केवल व्यक्तिगत उत्कृष्टता से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामूहिक प्रयास और टीम वर्क जरूरी है।
रोजर फेडरर और 1971 युद्ध के उदाहरण
कड़ी मेहनत और लगन का महत्व समझाने के लिए एडमिरल त्रिपाठी ने टेनिस के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर का उदाहरण दिया। वहीं साहस और बलिदान की प्रेरणा के लिए उन्होंने 1971 के युद्ध में सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के शौर्य को याद किया।
आत्म-अनुशासन और टीम भावना पर जोर
नौसेना प्रमुख ने युवाओं से आत्म-अनुशासन और टीम वर्क के मूल्यों को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर सोचना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “इसमें मेरा क्या फायदा है?” जैसी सोच को युवाओं को अपने शब्दकोश से बाहर करना होगा।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा वर्ग की है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। उस समय तक आज के अधिकांश युवा 37–40 वर्ष की आयु में होंगे और नेतृत्वकारी भूमिकाओं में होंगे।
राष्ट्र निर्माण की फिल्म के नायक युवा
उन्होंने ‘विकसित भारत’ के निर्माण की तुलना एक फिल्म से करते हुए कहा कि इस यात्रा में युवा इसके अभिनेता, अभिनेत्री, निर्माता, निर्देशक और कई बार दर्शक भी होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि युवा ऊर्जा को एकता और उद्देश्य के साथ जोड़ा जाए, तो यह राष्ट्र के विकास की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति बनेगी।