Uttarkashi cloudburst : उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मंगलवार को बादल फटने से आई भीषण बाढ़ में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने बुधवार को बताया कि अब तक लगभग 150 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, लेकिन सेना के 11 जवानों सहित करीब 50 लोग अब भी लापता हैं। एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक मोहसिन शाहेदी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में सेना, आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) और एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।
राहत में देरी रास्ता बंद
शाहेदी ने बताया कि एनडीआरएफ की तीन टीमें उत्तरकाशी के धराली गांव के लिए रवाना की गई थीं, लेकिन भूस्खलन की वजह से ऋषिकेश-उत्तरकाशी राजमार्ग अवरुद्ध हो गया, जिससे समय पर मौके पर पहुंचने में दिक्कत आई। इसके अलावा, खराब मौसम के चलते देहरादून से दो टीमों को हवाई मार्ग से रवाना नहीं किया जा सका। उन्होंने बताया कि ये टीमें प्रभावित इलाकों के पास हैं और जैसे ही रास्ता साफ होगा, राहत कार्य और तेज़ी से शुरू होंगे।
कब हुई बादल फटने की घटना
एनडीआरएफ अधिकारी के मुताबिक, मंगलवार दोपहर लगभग दो बजे उत्तरकाशी के कई गांवों में बादल फटने की घटना हुई, जिससे अचानक बाढ़ आ गई। इससे गांवों में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग फंस गए। उन्होने कहा ऊंचाई वाले इलाकों में पानी जमा होने से एक झील बन गई है, लेकिन फिलहाल उसका स्तर कम है और वह क्षेत्र सुरक्षित माना जा रहा है।
चार लोगों की हो चुकी है मौत
एनडीआरएफ रिपोर्ट के अनुसार, 11 सैन्यकर्मी लापता हैं, इस आपदा में चार लोगों की मौत हो चुकी है। लगभग 50 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। राहत एजेंसियां लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकतानुसार संसाधनों को तैनात कर रहा है।
किन्नौर कैलाश मार्ग से 413 यात्रियों को रेस्क्यू
इस बीच, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने एक अन्य राहत अभियान के तहत किन्नौर कैलाश यात्रा मार्ग से 413 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला है। आईटीबीपी प्रवक्ता ने बताया कि पर्वतीय मार्ग का बड़ा हिस्सा बह गया था, जिससे श्रद्धालु वहां फंस गए थे। उन्हें ‘ट्रैवर्स क्रॉसिंग’ तकनीक की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
राहत कार्य जारी
एनडीआरएफ, सेना और आईटीबीपी की टीमें अब भी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। अधिकारियों ने बताया कि राहत और खोज अभियान तेजी से जारी है और जैसे ही मौसम और रास्ते बेहतर होंगे, बचाव कार्य और तेज़ किया जाएगा।