Iran Israel War: पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव के बीच इजराइल और ईरान के बीच टकराव की आशंका और तेज हो गई है। रविवार को इजराइली सेना के प्रवक्ता कर्नल अविचे अद्राई ने फारसी भाषा में ईरान को सीधी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वह अपने “सैन्य हथियार उत्पादन कारखानों” को तुरंत खाली कर दे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब गाजा पट्टी, लेबनान और यमन में भी इजराइल की सैन्य सक्रियता देखी जा रही है
ईरान को ‘एक्स’ पर दी गई खुली चेतावनी
कर्नल अद्राई ने यह चेतावनी ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के जरिए दी, जो सीधे तौर पर ईरानी जनता और नेतृत्व को लक्षित थी। उन्होंने कहा कि ईरान को यह समझना चाहिए कि उसके हथियार निर्माण स्थलों को इजराइली सेना नजरअंदाज नहीं करेगी। यह पहली बार नहीं है जब अद्राई ने क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर संकेत दिए हैं। इससे पहले भी वे कई बार गाजा और लेबनान में इजराइली कार्रवाई की रूपरेखा पेश कर चुके हैं।
सैन्य संघर्ष की बढ़ गई है संभावना
इस चेतावनी के बाद क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य संघर्ष की संभावना बढ़ गई है। यह बयान उस वक्त आया जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शांति का प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि अगर इजराइल अपने हमले रोक देता है, तो ईरान भी अपनी प्रतिक्रिया को रोक देगा। अराघची का यह बयान ईरान की ओर से तनाव कम करने की पहल के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन इजराइली सेना की तरफ से आए जवाब ने स्थिति को फिर से संवेदनशील बना दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इजराइल की यह चेतावनी केवल एक बयान भर नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में किसी सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब गाजा में हमास के खिलाफ इजराइली अभियान पहले से जारी है और हिज़बुल्लाह के खिलाफ लेबनान सीमा पर भी झड़पें बढ़ रही हैं, ऐसे में ईरान को चेताना एक व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
ईरान और इजराइल के बीच तनाव की जड़ें गहरी हैं। ईरान, हमास और हिज़बुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन देता है, जबकि इजराइल इन संगठनों को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच शब्दों और सैन्य कार्रवाई दोनों के स्तर पर टकराव बढ़ा है। ऐसे में यह नया घटनाक्रम पूरे क्षेत्र को युद्ध की ओर धकेल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील
संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियां इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रही हैं। लेकिन फिलहाल जिस तरह की बयानबाज़ी और चेतावनियों का दौर चल रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया और भी अधिक अस्थिरता की ओर बढ़ सकता है।