One Nation One Election Bill: संसद का शीतकालीन सत्र अब तक हंगामेदार रहा है। गौतम अडानी और जॉर्ज सोरोस के मुद्दों को लेकर पक्ष और विपक्ष में जमकर तकरार देखने को मिली। गुरुवार को बीजेपी ने जॉर्ज सोरोस और सोनिया गांधी के संबंध को लेकर कांग्रेस को घेरा। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक हुई और बैठक में ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विधेयक को ग्रीन सिग्नल मिल गया। अगले सप्ताह इस विधेयक को सदन में पेश किया जा सकता है।
इससे पहले ‘एक देश, एक चुनाव’ पर बनी कोविंद समिति की रिपोर्ट को 18 सितंबर को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले 2019 में 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक देश एक चुनाव के अपने विचार को आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा था कि देश के एकीकरण की प्रक्रिया हमेशा चलती रहनी चाहिए। 2024 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी प्रधानमंत्री ने इस पर विचार रखा था।
बता दें कि, साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक राष्ट्र एक चुनाव पर पहली पर अपनी बात रखी थी। इसके बाद से लेकर अब तक बीजेपी कई मौकों पर एक देश एक चुनाव की बात की जाती रही है। इसके अनुसार, देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक हों। इसके 100 दिन बाद दूसरे चरण में स्थानीय निकाय चुनाव होने चाहिए। फिलहाल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव पांच साल के अंतराल पर होते हैं, इसकी संविधान में व्यवस्था की गई है। अलग-अलग राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अलग-अलग समय पर पूरा होता है, उसी के हिसाब से उस राज्य में विधानसभा चुनाव होते हैं।
वहीं, अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो इसका मौजूदा सरकारों पर प्रभाव पड़ना तय है क्योंकि कुछ विधानसभा का कार्यकाल घटाया जाएगा और कुछ विधानसभा का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा। इन तीन बिन्दुओं में समझे।
कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक देश-एक चुनाव लागू करने के लिए कई राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल घटेगा।
जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव 2023 के आखिर में हुए हैं, उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।
विधि आयोग के प्रस्ताव पर सभी दल सहमत हुए तो यह 2029 से ही लागू होगा। इसके लिए दिसंबर 2026 तक 25 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने होंगे।