Places of Worship Act: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के तहत दायर हुई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना ने कहा, जब तक हम इस मामले पर सुनवाई कर रहे हैं, तब तक देश में धार्मिक स्थलों को लेकर कोई नया मामला दाखिल नहीं किया जाएगा। जो केस पेंडिंग हैं, कोर्ट फाइनल ऑर्डर नहीं देंगे।
वर्शिप एक्ट के खिलाफ सीपीआई-एम, इंडियन मुस्लिम लीग, एनसीपी (शरद गुट), आरजेडी से मनोज कुमार झा समेत 6 पार्टियों ने याचिका लगाई है। सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की स्पेशल बेंच मामले की सुनवाई कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हुई। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले में हलफनामा दाखिल करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक केंद्र का जवाब दाखिल नहीं होता, तब तक मामले की सुनवाई पूरी तरह संभव नहीं है, साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई के दौरान किसी भी तरह के नए मुकदमे दर्ज नहीं किए जा सकते।
बता दें कि, यह अधिनियम धार्मिक स्थलों की स्थिति को 15 अगस्त 1947 के आधार पर संरक्षित करता है और उसमें बदलाव करने पर रोक लगाता है। हालांकि, इसमें अयोध्या विवाद को बाहर रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कई मुद्दे उठाए गए हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जाएगी।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि धार्मिक स्थलों को लेकर कोई भी नया मुकदमा दर्ज नहीं होगा, जो मुकदमे लंबित हैं, उनमें सुनवाई जारी रह सकती है लेकिन निचली अदालत कोई भी प्रभावी या अंतिम आदेश नहीं दें। निचली अदालत फिलहाल सर्वे का भी आदेश नहीं दे। केंद्र सरकार 4 सप्ताह में लंबित केस पर जवाब दाखिल करे। याचिकाकर्ता भी उसके बाद 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करें।