नई दिल्ली: दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने 5 अक्टूबर के अपने आदेश में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस को संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने और नियमित व अचानक जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक वाहनों में सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए चालकों की जांच अनिवार्य करने और यात्रियों की शिकायतों के लिए अलग व्यवस्था बनाने को कहा है। आदेश के पालन की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई है।
स्कूल-कॉलेज और कोचिंग सेंटरों के आसपास बढ़ेगी निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग सेंटरों के आसपास पुलिस की गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया है। पुलिस को उन स्थानों की पहचान करनी होगी, जहां महिलाओं और लड़कियों के साथ छेड़छाड़ या अन्य अपराध होने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे इलाकों में नियमित गश्त के साथ अचानक जांच भी की जाएगी, ताकि असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
बस, कैब और ऑटो चालकों की जांच अनिवार्य
अदालत ने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बस, टैक्सी, कैब और ऑटो चालकों की जांच के निर्देश दिए हैं। ये निर्देश ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप आधारित सेवाओं पर भी लागू होंगे। जांच और जरूरी रिकॉर्ड पूरा होने के बाद ही चालकों और सहायकों को वाहन चलाने की अनुमति दी जाएगी।
वाहनों के भीतर चालक और सहायक का नाम व फोटो स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा। इसके अलावा चालकों के लिए वर्दी पहनना या ऐसा पहचान पत्र रखना जरूरी होगा, जिससे यात्री उनकी पहचान आसानी से कर सकें।
बिना जांच दूसरे व्यक्ति को वाहन देने पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी वाहन को दूसरे व्यक्ति के हवाले करने से पहले उसकी जांच होनी चाहिए। बिना जांच किसी अन्य चालक को वाहन चलाने की अनुमति देना नियमों के खिलाफ होगा। पुलिस और परिवहन विभाग को जांच चौकियां बनाकर नियमित अंतराल पर और अचानक वाहनों व चालकों की जांच करने को कहा गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर चालक या सहायक को निलंबित किया जा सकता है या नौकरी से हटाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर संबंधित वाहन को तत्काल जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों पर भी नजर
अदालत ने यात्रियों की शिकायतों के लिए अलग व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है, ताकि किसी वाहन या चालक से जुड़ी समस्या सामने आने पर शिकायत दर्ज कर उचित कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही सड़क किनारे खड़े उन ट्रकों और भारी वाहनों की पहचान करने को कहा गया है, जिनकी वजह से सामने का रास्ता दिखाई नहीं देता और अंधे मोड़ या ऐसे स्थान बन जाते हैं, जहां से गुजरने वालों पर नजर रखना मुश्किल होता है। ऐसे वाहनों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। बिना अनुमति लोगों के बैठे या ठहरे पाए जाने वाले वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
अवैध शराब की बिक्री और भीड़ पर होगी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बिना जरूरी अनुमति चल रही शराब की दुकानों और उन खाने-पीने के ठिकानों की पहचान करने को कहा है, जहां गैरकानूनी तरीके से शराब परोसी जाती है। पुलिस के बीट अधिकारियों को ऐसे स्थानों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। शराब की दुकानों के आसपास अनावश्यक रूप से जमा होने वाले लोगों और भीड़ को हटाने के लिए भी कार्रवाई की जाएगी। इन कदमों का उद्देश्य महिलाओं को छेड़छाड़ से बचाना और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है।
मुख्य सचिव और पुलिस कमिश्नर की तय होगी जवाबदेही
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों को लागू कराने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को दी है। दोनों अधिकारियों को अदालत में हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि आदेश के पालन के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मुख्य सचिव दिल्ली प्रशासन की ओर से, जबकि पुलिस कमिश्नर दिल्ली पुलिस की ओर से हलफनामा दाखिल करेंगे।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का पालन नहीं होने पर दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाब देना पड़ सकता है। इस तरह महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े आदेशों को लागू कराने में लापरवाही होने पर दिल्ली प्रशासन और पुलिस के शीर्ष अधिकारियों की सीधे जवाबदेही तय होगी।