लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को सोशल मीडिया पर रील देखने में समय बर्बाद करने के बजाय खेल और अपने भविष्य पर ध्यान देने की सलाह दी है। गुरुवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के कुशल खिलाड़ी कोटे के तहत चयनित 470 खिलाड़ियों को नियुक्ति-पत्र वितरित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि युवाओं को घंटों रील देखने में बिताते देखकर दुख होता है। उन्होंने कहा कि रील पर लाइक्स मिलते हैं, लेकिन खेल के मैदान में जीवन मिलता है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को मेहनत जारी रखने और पुलिस की वर्दी में भी खेल के मैदान जैसा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा।
‘जर्सी से वर्दी तक का सफर शुरू हुआ’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस बल में चयनित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि नियुक्ति-पत्र मिलने के साथ ही उनकी ‘जर्सी से वर्दी’ तक की यात्रा शुरू हो गई है। खेल के मैदान में खिलाड़ियों ने जो मेहनत की और जो परिणाम हासिल किए, सरकार को वर्दी में भी उनसे उसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने चुनौतियों और पारिवारिक समस्याओं को अपनी मेहनत के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए सफलता हासिल की। अब उत्तर प्रदेश पुलिस का हिस्सा बनने के बाद भी उन्हें इसी भावना के साथ काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी उद्देश्य से वह स्वयं कार्यक्रम में उपस्थित हुए हैं।
‘लाइक्स चाहिए या जिंदगी की असली लाइफ’
युवाओं की रील देखने की आदत पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के युवा घंटों रील देखने में बिता देते हैं। उन्होंने युवाओं से सवाल किया कि उन्हें सोशल मीडिया पर लाइक्स चाहिए या जीवन में वास्तविक सफलता हासिल करनी है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “रील में लाइक्स मिलते हैं, लेकिन खेल के मैदान में आपको लाइफ मिलती है।” उन्होंने इसे एक नई जिंदगी से जोड़ते हुए कहा कि खिलाड़ियों को नियुक्ति-पत्र के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। युवाओं को तय करना चाहिए कि वे अपना समय सोशल मीडिया पर बिताना चाहते हैं या खेल और मेहनत के जरिए अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहते हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री युवाओं को लिखे पत्र में भी रोजगार को लेकर अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को केवल रोजगार पाने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला भी बनना चाहिए। इसके लिए सरकार ने नए अवसरों के दरवाजे खोले हैं।
‘पहले सिफारिश से मिलती थी नौकरी’
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में ऐसा गठबंधन था, जो प्रदेश को पीछे ले जाने का काम करता था। उनके मुताबिक, उस दौर में युवाओं के सामने पहचान का संकट था और नौकरियों में भी गड़बड़ी होती थी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले नौकरी पाने के लिए दो ही रास्ते बताए जाते थे सैफई या सिफारिश। उन्होंने मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार को ‘नौकरी देंगे एलायंस’ बताते हुए कहा कि अब युवाओं को अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहले देश राष्ट्रमंडल खेलों के घोटालों को लेकर चर्चा में रहता था, जबकि अब खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने से वे देश के लिए पदक जीत रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान भी बदली है। पहले प्रदेश में हत्या की घटनाओं को लेकर चर्चा होती थी, लेकिन अब कुशल खिलाड़ियों के पदक जीतने से प्रदेश का नाम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने हत्या और पदक के बीच अंतर बताते हुए कहा कि एक प्रदेश की पहचान खराब करता है, जबकि दूसरा उसे पहचान दिलाता है।
रील देखने में रोजाना घंटों बिता रहे युवा
सोशल मीडिया पर किए गए एक सर्वे के मुताबिक, भारत के युवा रोजाना औसतन दो घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं। 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोग करीब 78 मिनट सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को शामिल करने पर सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले औसत समय का आंकड़ा करीब 98 मिनट बताया गया है।
वडोदरा की एमएस यूनिवर्सिटी की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, एक विद्यार्थी रोजाना 360 से 480 रील देखता है और लगभग हर 15 सेकंड में अगली रील पर चला जाता है। इस प्रक्रिया में उसका डेढ़ से दो घंटे तक का समय खर्च हो जाता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विद्यार्थियों के रोजाना स्क्रीन समय का 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा छोटे वीडियो देखने में बीतता है। कई बार वे यह भी याद नहीं रख पाते कि उन्होंने पिछला वीडियो कौन-सा देखा था। युवाओं के समय के इसी इस्तेमाल को लेकर मुख्यमंत्री ने चिंता जताई और उन्हें सोशल मीडिया के बजाय खेल, मेहनत और अपने भविष्य को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।