लखनऊ: श्रावण माह की शुरुआत के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखकर इस पवित्र महीने के धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि श्रावण केवल भगवान शिव की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि लोकमंगल, श्रम-सम्मान, सेवा, स्वच्छता, सामूहिकता और प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाने की अपील की।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भगवान शिव की आराधना मनुष्य को संयम, सेवा और समरसता की प्रेरणा देती है। शिव का हलाहल पान सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का जीवन और उनका चरित्र समाज को दूसरों के कल्याण के लिए त्याग और समर्पण की प्रेरणा देता है। श्रावण माह में शिवभक्ति के साथ लोककल्याण की भावना को भी आगे बढ़ाने की जरूरत है।
श्रावण में दिखती है सामूहिक श्रम और साझा संस्कृति
सीएम योगी ने कहा कि श्रावण का संबंध केवल धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और सामूहिक श्रम की परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा है। धान की रोपाई के बाद होने वाला सहभोज सामूहिकता और साझा संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में लोग मिल-जुलकर श्रम करते हैं और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनते हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि श्रावण प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और उसके संरक्षण का संदेश भी देता है। बारिश के इस मौसम में प्रकृति नए रूप में दिखाई देती है। ऐसे में लोगों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए और प्रकृति से जितना लेते हैं, उतना ही उसे लौटाने का संकल्प भी लेना चाहिए।
जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर
सीएम योगी ने अपनी पाती में जल संरक्षण को विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि पंचतत्वों में जल जीवन का मूल आधार है और इसका संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। जनभागीदारी के बिना जल संरक्षण का अभियान सफल नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से पानी की हर बूंद को बचाने और जल स्रोतों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए गए हैं। उन्होंने जल संरक्षण के लिए किए जा रहे स्थानीय प्रयासों का भी उल्लेख किया। सीएम के अनुसार, लखनऊ की एक सोसाइटी ने करीब 50 हजार लीटर जल पुनर्भरण की पहल की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं और स्थानीय स्तर पर जल संकट से निपटने में मददगार हो सकते हैं।
‘हर बूंद का सम्मान, हर पौधे का संरक्षण करें’
सीएम योगी ने प्रदेशवासियों से अपील की कि श्रावण माह को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का महीना बनाएं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति पानी की बचत करे, पौधे लगाए और लगाए गए पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी उठाए।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता हमारी संस्कृति का हिस्सा रही है। इसलिए श्रावण के अवसर पर हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि प्रकृति से जितना लिया जाए, उतना उसे लौटाने का प्रयास भी किया जाए। उन्होंने कहा कि हर बूंद का सम्मान और हर पौधे का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखेगा।