भिवानी (हरियाणा)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किलोग्राम मुक्केबाजी वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय मुक्केबाज सचिन सिवाच के पैतृक गांव मिताथल और घर पर खुशी का माहौल छा गया। पदक जीतने की खबर मिलते ही परिवार और गांव वालों ने जोरदार जश्न मनाया।
सचिन सिवाच ने ग्लासगो में खेले गए फाइनल मुकाबले में नामीबिया के ट्रायअगेन मॉर्निंग नडेवेलो को 3-2 के कांटे के फैसले से हराया। पहले दो राउंड में पिछड़ने के बावजूद उन्होंने अंतिम राउंड में शानदार वापसी की। निर्णायक दौर में उन्होंने विरोधी पर दबाव बनाते हुए स्टैंडिंग काउंट तक कराया, जिसके बाद जजों ने उन्हें विजेता घोषित कर दिया। यह भारत का मुक्केबाजी में छठा स्वर्ण पदक था।
कौन हैं सचिन?
सचिन भारतीय सेना की महार रेजिमेंट में हवलदार हैं और भिवानी के मुक्केबाजी गढ़ से आते हैं। 26 वर्षीय इस खिलाड़ी ने टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया। सेमीफाइनल में उन्होंने वेल्स के ओवेन हैरिस-एलन को 5-0 से हराया था। उनकी इस उपलब्धि से पूरे हरियाणा, खासकर भिवानी में उत्साह का माहौल है। गांव में देर रात तक जश्न जारी रहा। परिवार के सदस्यों ने टीवी के सामने सांस रोककर मुकाबला देखा और जीत के बाद खुशी से झूम उठे।
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुक्केबाजी में इतिहास रचते हुए सात स्वर्ण पदक जीते हैं। सचिन की जीत ने देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का एक और उदाहरण पेश किया है। पूरा देश उनकी इस कामेबैक जीत पर गर्व महसूस कर रहा है। भिवानी के मिताथल गांव में भी इस सफलता को लेकर उत्साह बरकरार है।