नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत गैस आधारित नए यूरिया उत्पादन संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे देश में यूरिया उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा, “देशभर के अपने किसान भाई-बहनों के कल्याण के लिए हमारी सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। इसी कड़ी में आज राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे न सिर्फ गैस आधारित नए यूरिया उत्पादन संयंत्रों की स्थापना के लिए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता के संकल्प को भी नई मजबूती मिलेगी।”
यूरिया में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
यह नीति भारत को यूरिया क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में भारत यूरिया का बड़ा आयातक है, जिससे विदेशी मुद्रा का भारी बहिर्वाह होता है। नई नीति के माध्यम से निजी क्षेत्र को भी निवेश के लिए आकर्षित किया जाएगा। इससे न केवल रोजगार सृजन होगा बल्कि किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध हो सकेगा।
किसान हुए गदगद
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति दीर्घकालिक रूप से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल उत्पादकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 तक यूरिया उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो।इस फैसले का स्वागत करते हुए किसान संगठनों ने कहा कि यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को मजबूत करेगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि नीति के क्रियान्वयन पर नजर रखी जाए ताकि लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे।