लोक सेवकों को प्रधानमंत्री मोदी का संदेश, नागरिक देवो भव’ हर निर्णय का हो मूलमंत्र

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक करोड़ से अधिक लोक सेवकों को पत्र लिखकर ‘नागरिक देवो भव’ (नागरिक ही भगवान है) के सिद्धांत को शासन का मूलमंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार का हर निर्णय नागरिकों को केंद्र में रखकर लिया जाना चाहिए और सार्वजनिक सेवा का उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए।

करुणा आधारित शासन पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि शासन व्यवस्था करुणा और संवेदनशीलता पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने लोक सेवकों से अपेक्षा की कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सेवा, समर्पण और सहानुभूति का परिचय दें। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में कार्यरत लोगों को आजीवन सीखते रहने का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

12 भाषाओं में जारी हुआ पत्र

यह पत्र 20 अप्रैल को सिविल सेवा दिवस से एक दिन पहले लिखा गया था और इसे 12 भाषाओं में जैसे हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, ओडिया, गुजराती, बांग्ला, कन्नड़, पंजाबी, असमिया, मलयालम, तेलुगु और तमिल में जारी किया गया।

21वीं सदी चुनौतियां और अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी तेजी से बदलते रुझानों, नई प्रौद्योगिकियों और नवाचारों का दौर है। ऐसे समय में नागरिकों और वैश्विक समुदाय की भारत से अपेक्षाएं भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यसंस्कृति और सेवाओं को इस परिवर्तन के अनुरूप ढालना आवश्यक है।

आईगॉट कर्मयोगी’ और आजीवन सीखने पर बल

प्रधानमंत्री ने आईगॉट कर्मयोगी मंच का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लोक सेवकों के लिए आजीवन सीखने को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि बेहतर बनने की दिशा में किया गया हर प्रयास देश को बेहतर बनाने में योगदान देता है।

त्योहारों के बीच ‘साधना सप्ताह’ का आयोजन

पीएम मोदी ने पत्र में देशभर में मनाए जा रहे विभिन्न त्योहारों रोंगाली बिहू, विशु, पुथंडू, पोइला बोइशाख, महा बिशुबा पाना संक्रांति और बैसाखी का उल्लेख करते हुए इन्हें आशा और नई शुरुआत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में आयोजित ‘साधना सप्ताह’ सीखने और आत्मविकास का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब कार्यों का मूल्यांकन केवल प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के संदर्भ में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी प्रयासों की दिशा, गति और व्यापकता इसी दृष्टिकोण से निर्धारित होनी चाहिए।

सामूहिक प्रयासों से ही प्रगति

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की प्रगति हर राज्य और हर विभाग के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोक सेवकों के सेवाभाव की सराहना करते हुए उन्हें ‘कर्मयोगी’ बताया और देश निर्माण में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

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