चंडीगढ़: हरियाणा में IDFC फ़र्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा से सरकारी खातों में हुई 578 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का पूरा पैसा एक दिन में वापस मिल गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में यह जानकारी खुद दी। उन्होंने कहा कि बैंक ने 556 करोड़ मूलधन और 22 करोड़ ब्याज लौटाकर कुल 578 करोड़ रुपये सरकारी खातों में जमा कर दिए हैं।
कैसे हुआ धोखाधड़ी का खुलासा?
घटना तब सामने आई जब एक विभाग ने खाता बंद करने की प्रक्रिया शुरू की और रिकॉर्ड-मिलान में विसंगति दिखी। जाँच में पता चला कि शाखा के कुछ मध्यम-स्तर के कर्मचारियों ने फर्जी डेबिट नोट और चेक के सहारे सरकारी फंड कई खातों में ट्रांसफर किए थे। फर्जीवाड़े की भनक लगते ही सरकार ने बैंक पर दबाव बनाया।
IDFC ने 4 कर्मचारियों को किया सस्पेंड
IDFC फ़र्स्ट बैंक ने चार कर्मचारियों को निलंबित किया, KPMG से फ़ॉरेंसिक ऑडिट शुरू कराया और स्टॉक एक्सचेंज को सूचना दी। हरियाणा एंटी-करप्शन ब्यूरो ने FIR दर्ज कर पूर्व शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया। राज्य सरकार ने वित्त सचिव की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय समिति बनाई है और IDFC फ़र्स्ट व AU स्मॉल फ़ाइनेंस बैंक को सरकारी लेन-देन के लिए डी-एम्पैनल कर दिया।
बुरी नज़र रखने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
मुख्यमंत्री सैनी ने सदन में दोहराया कि सरकारी पैसे पर बुरी नज़र रखने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। समिति भविष्य में ऐसी चूकों को रोकने के उपाय सुझाएगी। 24 घंटे में हुई इस वसूली को सरकार “सर्जिकल एक्शन” बता रही है, जबकि मामले की विस्तृत जाँच जारी है।