नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को कहा कि देश में एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) और रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (आरआईजी) की कोई कमी नहीं है और इनकी उपलब्धता घरेलू मांग से अधिक है।
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के जवाब में उन्होंने कहा कि इन दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रियल-टाइम निगरानी प्रणाली भी लागू है। उन्होंने कहा कि एआरवी और आरआईजी की कमी को लेकर बनी धारणा गलत है और इनके निर्यात पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं है।
दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है
मंत्री के अनुसार, देश में एआरवी की वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 8.17 करोड़ वायल और आरआईजी की करीब 1.77 करोड़ वायल है। उन्होंने बताया कि भारत में हर साल पशुओं के काटने के लगभग 58 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से करीब 47 लाख मामले कुत्तों के काटने के होते हैं। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट है कि देश में इन दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है और निर्यात के लिए भी अतिरिक्त भंडार मौजूद है।
जेपी नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए एआरवी और आरआईजी के वितरण की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है। उन्होंने बताया कि इन दवाओं का उत्पादन कई निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों द्वारा किया जाता है, इसलिए केंद्र स्तर पर वर्षवार समेकित आंकड़े नहीं रखे जाते।
सरकारी योजनाएं और व्यवस्था
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (एनआरसीपी) के तहत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय मुफ्त औषधि पहल (एनएफडीआई) के तहत इन दवाओं की खरीद के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है।
खरीद प्रक्रिया विकेंद्रीकृत है और राज्यों को समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, ताकि एआरवी और आरआईजी की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय के अनुसार, वर्ष 2024-25 में आरआईजी का 64,131 किलोग्राम और एआरवी का 2,81,139 किलोग्राम निर्यात किया गया।