नई दिल्ली: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को बहुचर्चित जमीन के बदले नौकरी घोटाले में आरजेडी सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी
विशेष जज विशाल गोगने ने फैसला सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी ‘निजी जागीर’ बनाकर आपराधिक उद्यम चलाया, जहां सरकारी नौकरियों को सौदेबाजी का हथियार बनाकर परिवार के लिए जमीनें हासिल की गईं। कोर्ट ने कहा कि यादव परिवार ने ‘आपराधिक सिंडिकेट’ की तरह काम किया और एक व्यापक साजिश रची।
जानें क्या था पूरा मामला?
यह मामला 2004-2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते का है। सीबीआई के अनुसार, रेलवे के पश्चिम मध्य जोन (जबलपुर मुख्यालय) में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां नियमों को ताक पर रखकर की गईं। इन नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से सस्ते दामों पर जमीनें ली गईं, जो बाद में लालू परिवार या उनके करीबियों के नाम ट्रांसफर की गईं। कई मामलों में बेनामी संपत्तियों का इस्तेमाल हुआ। आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धोखाधड़ी (आईपीसी 420) और आपराधिक साजिश (120बी) के तहत लगाए गए हैं।
52 आरोपी बरी
कोर्ट ने कुल 103 आरोपियों में से 5 की मौत के बाद शेष 98 में से 52 को बरी कर दिया, जिनमें कई रेलवे अधिकारी शामिल थे। बाकी 41 पर आरोप तय किए गए। सभी आरोपियों की बरी करने की याचिका को कोर्ट ने ‘अनुचित’ बताकर खारिज कर दिया। औपचारिक रूप से आरोप तय करने की अगली तारीख 23 या 29 जनवरी तय की गई है, जहां आरोपी दोष स्वीकार या इनकार करेंगे।
तेजस्वी, तेज प्रताप और मीसा भारती कोर्ट में पेश
तेजस्वी, तेज प्रताप और मीसा भारती कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए, जबकि लालू और राबड़ी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। यादव परिवार ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है और 600 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है।