नई दिल्ली: राजधानी में पुरानी दिल्ली क्षेत्र में स्थित तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने 7 जनवरी 2026 को तड़के बड़ी कार्रवाई की। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई इस कार्रवाई में करीब 17 से 32 बुलडोजर और पोक्लेन मशीनें लगाई गईं। मस्जिद का मुख्य ढांचा पूरी तरह सुरक्षित रहा, लेकिन उसके पास बने अवैध बारात घर, डिस्पेंसरी, दुकानें और अन्य निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया।
रात 1 बजे गरजा बुलडोजर
कार्रवाई आधी रात करीब 1 बजे शुरू हुई, जिससे स्थानीय लोग हैरान रह गए। भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की तैनाती के बावजूद कुछ उपद्रवियों ने विरोध जताया और पुलिस पर पत्थरबाजी की। इस दौरान 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें चांदनी महल थाने के एसएचओ महावीर प्रसाद गंभीर रूप से चोटिल हुए। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और हल्का बल प्रयोग किया। पत्थरबाजी करने वाले 5 से 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग से अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई नवंबर 2025 के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर आधारित थी, जिसमें रामलीला मैदान के पास करीब 38,940 वर्ग फुट अतिक्रमित भूमि खाली करने का निर्देश दिया गया था। मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने इसे चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने नोटिस जारी कर कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी। अधिकारियों का कहना है कि केवल सार्वजनिक भूमि पर बने अवैध निर्माण ही तोड़े गए, मस्जिद या कब्रिस्तान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
इलाके में बढ़ा तनाव
घटना के बाद इलाके में तनाव रहा, लेकिन सुबह तक स्थिति सामान्य हो गई। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन ने इसे कानून का पालन बताया। यह मामला 1976 की इमरजेंसी के दौरान तुर्कमान गेट बुलडोजर एक्शन की यादें ताजा कर रहा है। जांच जारी है और शांति की अपील की गई है।