ISRO ने किया बाहुबली LVM3-M6 मिशन का सफल प्रक्षेपण, जानें भारत की इससे कितनी बढ़ेगी ताक़त

(श्रीहरिकोटा) क्रिसमस से पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इसरो के सबसे भारी प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 एम6 (जिसे ‘बाहुबली’ भी कहा जाता है) ने अमेरिकी संचार उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 (6,100 किलोग्राम) को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। इस मिशन को इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने देश के लिए “नववर्ष और क्रिसमस का उपहार” बताया।

सबसे भारी उपग्रह

एलवीएम-3 एम6 ने अब तक का सबसे भारी पेलोड स्थापित किया। इससे पहले सबसे भारी प्रक्षेपण एलवीएम-3 एम5 था, जिसका उपग्रह 4,400 किलोग्राम का था। इस मिशन के साथ, इसरो ने केवल 52 दिनों के भीतर दो भारी एलवीएम-3 मिशन सफलतापूर्वक पूरा किए।

‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ का उद्देश्य दुनिया भर में सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। यह उपग्रह 4G और 5G नेटवर्क के माध्यम से कॉल, संदेश, स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाएं प्रदान करेगा। मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और एएसटी स्पेसमोबाइल के वाणिज्यिक समझौते के तहत संचालित हुआ।

मिशन की मुख्य विशेषताएँ

एलवीएम-3 एम6 तीन चरण वाला यान है, जिसमें क्रायोजेनिक इंजन और दो एस-200 ठोस बूस्टर लगे हैं। प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के दूसरे पैड से सुबह 8:55 बजे हुआ और 15 मिनट में उपग्रह को कक्षा में स्थापित कर दिया गया। मिशन नियंत्रण केंद्र में सफलता के बाद तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।

भारत का योगदान और भविष्य

इसरो ने अब तक 34 देशों के लिए 434 उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं। अध्यक्ष नारायणन ने कहा कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। भविष्य में गगनयान मिशन और छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यानों (SSLV) का परिचालन भी शुरू होगा।ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह स्मार्टफोन के माध्यम से उच्च गति वाली ब्रॉडबैंड सेवा प्रदान करेगा। एएसटी स्पेसमोबाइल अपनी नेटवर्क कवरेज बढ़ाने और 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करने की योजना बना रहा है। इस मिशन ने भारत की भारी पेलोड प्रक्षेपण क्षमता और वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में उसकी भूमिका को और मजबूत किया।

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