(मस्कट): भारत और ओमान ने गुरुवार को मुक्त व्यापार समझौते (CEPA/FTA) पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। मोदी का अल बरका पैलेस में सुल्तान ने स्वागत किया। यह यात्रा मोदी की तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में हुई।
द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कृषि, प्रौद्योगिकी, नवोन्मेषी क्षेत्रों, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर के मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने भारत और ओमान के बीच कूटनीतिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने को एक अहम उपलब्धि बताया। CEPA पर हस्ताक्षर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के मंत्री कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने किए।
CEPA से व्यापार और निवेश को बढ़ावा
यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करेगा, आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करेगा और आर्थिक विविधीकरण को बढ़ावा देगा। यह ओमान का किसी देश के साथ दूसरा FTA है और पिछले 20 वर्षों में पहला समझौता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि CEPA द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा और विश्वास देगा। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी में “नया अध्याय” बताया। इसके तहत व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे, आर्थिक वृद्धि को बल मिलेगा और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।
द्विपक्षीय व्यापार की स्थिति
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ओमान का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 10.5 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 4 अरब डॉलर और आयात 6.54 अरब डॉलर था। भारत से ओमान को खनिज ईंधन, रसायन, बहुमूल्य धातु, लोहा-इस्पात, अनाज, जहाज और मशीनरी निर्यात की जाती है। वहीं, ओमान से भारत को पेट्रोलियम उत्पाद, यूरिया, प्रोपिलीन, एथिलीन पॉलिमर, पेटकोक, जिप्सम, रसायन और धातु आयात होती हैं। ओमान खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। भारत ने पहले से ही ब्रिटेन, EFTA, ऑस्ट्रेलिया, UAE और मॉरीशस के साथ FTA किए हैं।
आर्थिक अवसर और भविष्य की योजनाएं
CEPA के माध्यम से दोनों देशों को वैश्विक आर्थिक पुनर्निर्धारण के दौर में व्यापार विविधीकरण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा, नए निवेश आकर्षित होंगे और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इस खाड़ी देश की उनकी दूसरी यात्रा है और भारत-ओमान के 70 वर्षों के राजनयिक संबंधों की वर्षगांठ के समय विशेष महत्व रखती है।