(नई दिल्ली): केंद्रीय स्वास्थ्य और रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने घरेलू फार्मास्युटिकल उद्योग से अपील की है कि वह आयातित कच्चे माल और महत्वपूर्ण सक्रिय औषधीय तत्व (एपीआई) पर निर्भरता कम करके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करे। उन्होंने अगले दशक के लिए उद्योग की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत को दुनिया की फार्मेसी से दुनिया की प्रयोगशाला में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
ओपीपीआई के 60वें सम्मेलन में नवाचार पर जोर
ओर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ़ इंडिया (ओपीपीआई) के 60वें वार्षिक सम्मेलन में अपने वीडियो संदेश में नड्डा ने उद्योग के अग्रणी लोगों से बायोसिमिलर, नए मॉलिक्यूल्स, जीन और सेल थेरेपी, एआई-संचालित दवा खोज और ‘एडवांस्ड डायग्नोस्टिक्स’ में नवाचार बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह नवाचार न केवल भारत के औषधीय परिदृश्य को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक फार्मास्युटिकल उद्योग में भारत की भूमिका को भी बढ़ाएगा।
स्वास्थ्य सुरक्षा और किफायती दवाओं पर ध्यान
नड्डा ने आयुष्मान भारत जैसी पहल पर भी जोर दिया, जो अब 60 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है। इसके साथ ही जन औषधि केंद्रों के माध्यम से आवश्यक दवाओं की कीमतों में भारी कमी आई है। उन्होंने कहा कि इन पहलों ने देश में स्वास्थ्य तक पहुंच और औषधीय सुलभता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वैश्विक शोध और डिजिटल नवाचार केंद्र
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि भारत तेजी से वैश्विक शोध और डिजिटल नवाचार का केंद्र बनता जा रहा है। देश में 1,600 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित हैं, जिनमें फार्मास्युटिकल और जीवन विज्ञान के कई केंद्र शामिल हैं। ये केंद्र नवाचार और नए विकासक्रम को बढ़ावा देने में मदद कर रहे हैं और भारत को वैश्विक औषधीय अनुसंधान में अग्रणी स्थान दिलाने में योगदान दे रहे हैं। नड्डा ने घरेलू फार्मास्युटिकल उद्योग से अपील की है कि वह आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे और नवाचार के माध्यम से भारत को वैश्विक फार्मा उद्योग में नेतृत्व प्रदान करे।