एससीओ बैठक में एस जयशंकर का सख्त बयान, कहा- आतंकवाद के खिलाफ लीपापोती नहीं होगी बर्दाश्त

SCO Meeting 2025: (मॉस्को): भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद के किसी भी रूप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इसे छुपाया या नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सभी सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाने का आह्वान किया।

एससीओ का उद्देश्य और भारत की भूमिका

जयशंकर ने कहा कि एससीओ की स्थापना 2001 में रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों द्वारा आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए की गई थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके स्थायी सदस्य बने। हाल ही में ईरान को भी एससीओ का स्थायी सदस्य बनाया गया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में एससीओ को अपने एजेंडे को विस्तारित करने और अपने कार्य पद्धति में सुधार करने की जरूरत है। जयशंकर ने कहा हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि संगठन की स्थापना आतंकवाद और अन्य खतरों के खिलाफ सहयोग बढ़ाने के लिए हुई थी, और ये खतरे अब पहले से भी अधिक गंभीर हो गए हैं।

आर्थिक सहयोग और वैश्विक साझेदारी

जयशंकर ने वैश्विक आर्थिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक अस्थिरता और मांग-पक्ष की जटिलताओं के कारण आपूर्ति संबंधी जोखिम बढ़ गए हैं। उनका कहना था कि इस स्थिति में व्यापक आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौतों को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार और निवेश के सभी प्रयास निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायसंगत होने चाहिए। भारत सदस्यों के साथ मिलकर आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

सांस्कृतिक और मानव संबंधों पर जोर

उन्होंने जयशंकर ने एससीओ में सांस्कृतिक और मानव संबंधों की अहमियत पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बुद्धिजीवियों, कलाकारों, खिलाड़ियों और सांस्कृतिक हस्तियों के बीच बेहतर संपर्क सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ाएगा। “लोगों के बीच आदान-प्रदान किसी भी वास्तविक संबंध की नींव है। जयशंकर ने अंत में सभी देशों से आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनका संदेश स्पष्ट था आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और किसी प्रकार की लीपापोती बर्दाश्त नहीं होगी।

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