शीर्ष नक्सली कमांडर हिडमा आंध्र प्रदेश में मुठभेड़ में ढेर, पत्नी समेत छह माओवादी मारे गए

(रायपुर): आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के मरेदुमिल्ली मंडल के घने जंगलों में मंगलवार सुबह सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में शीर्ष नक्सली कमांडर माडवी हिडमा और उसकी पत्नी सहित छह उग्रवादी मारे गए। यह मुठभेड़ सुबह साढ़े छह से सात बजे के बीच हुई, जिसमें दो महिलाएं और चार पुरुष ढेर हुए। पुलिस ने घटनास्थल से दो AK-47 राइफल, एक पिस्तौल, रिवॉल्वर, डेटोनेटर और अन्य सामग्री बरामद की है।

हिडमा की मौत नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता

हिडमा दंडकारण्य में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन नंबर-एक का प्रमुख कमांडर था और पिछले दो दशकों में कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था। 2010 में दंतेवाड़ा के ताड़मेटला हमले में 76 सुरक्षाकर्मियों की हत्या के बाद वह सबसे वांछित नक्सलियों की सूची में सबसे ऊपर पहुंच गया था। उस पर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था और उसका चार-स्तरीय सुरक्षा घेरा तथा जंगलों में लगातार बदलते ठिकाने उसे वर्षों तक पकड़ से दूर रखते थे। उसकी पत्नी मदकम राजे भी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती थी और मुठभेड़ में उसके साथ ही मारी गई।

खुफिया इनपुट के बाद बड़ा ऑपरेशन

अल्लूरी सीतारामराजू जिले के एसपी अमित बरदार ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से आंध्र प्रदेश–छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमा के जंगलों में माओवादी गतिविधियों में तेजी देखी जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियों को लगातार यह जानकारी मिल रही थी कि छत्तीसगढ़ में दबाव बढ़ने के बाद कुछ शीर्ष माओवादी नेता आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहे हैं। इसी आधार पर एक संयुक्त अभियान चलाया गया, जिसके दौरान मंगलवार सुबह माओवादियों ने पुलिस दल पर गोलीबारी की। जवाबी कार्रवाई में छह माओवादी मारे गए जबकि कुछ अन्य घने जंगलों का फायदा उठाकर भाग निकले। इलाके में तलाशी अभियान अभी भी जारी है।

विभिन्न जिलों से 31 माओवादी हिरासत में

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने प्रदेशभर में अपनी कार्रवाई तेज कर दी। एनटीआर, कृष्णा, काकीनाडा और एलुरु जिलों में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) से जुड़े 31 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से 28 को विजयवाड़ा के पास पकड़ा गया। कृष्णा जिले के एसपी विद्या सागर नायडू के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में से नौ ऐसे हैं जिनका हिडमा से सीधा संबंध था और जो केंद्रीय समिति के सदस्य देवजी के सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते थे। ये सभी कथित तौर पर छत्तीसगढ़ से आए थे और क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों को दोबारा सक्रिय करने का प्रयास कर रहे थे।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने कहा कि निर्दोष आदिवासी युवाओं को शहरी नक्सलियों के बहकावे में नहीं आना चाहिए और हिंसा से दूर रहना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक माओवादी गतिविधियों का पूर्ण सफाया करना है और इस दिशा में लगातार कार्रवाई जारी है। उन्होंने माओवादियों से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।

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