Pandit Dhirendra Krishna Shastri: (नई दिल्ली): बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिल्ली से वृंदावन तक 10 दिन की पदयात्रा शुरू की है। यह यात्रा 7 नवंबर से 16 नवंबर तक चलेगी इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन हिंदू एकता को मजबूत करना और यमुना नदी को गंगा की तरह शुद्ध व पवित्र बनाना है
बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन एकता पदयात्रा 7 नवंबर को दिल्ली के छतरपुर स्थित श्री कात्यानी मंदिर से शुरू की । आज शनिवार, 8 नवंबर को यह पदयात्रा गुरुग्राम सड़क के माध्यम से फरीदाबाद में प्रवेश कर चुकी है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन और द ग्रेट खली समेत कई प्रमुख लोग इस पदयात्रा में शामिल हुए और सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
यमुना की सफाई और सनातन धर्म के मुद्दे
धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उनकी इस यात्रा का उद्देश्य यमुना नदी के प्रदूषण पर ध्यान आकर्षित करना और इसे शुद्ध बनाना है। यमुनोत्री से निकलने वाली यमुना हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के रास्ते में गंभीर रूप से प्रदूषित हो जाती है। इसके अलावा, पदयात्रा के दौरान ब्रज क्षेत्र में मांस और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध, गाय को राष्ट्र माता का दर्जा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि में भव्य मंदिर निर्माण जैसे मुद्दे भी उठाए जाएंगे। शास्त्री ने पदयात्रा से पहले उत्तराखंड जाकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मुलाकात की थी।
प्रसिद्ध व्यक्तियों और साधु संतों का समर्थन
कथावाचक जया किशोरी इस अभियान में शामिल होंगी। साथ ही कवि कुमार विश्वास,अक्षरा सिंह, सुनील ग्रोवर जैसे कलाकार भी यात्रा में शामिल हो सकते हैं। इस पदयात्रा में कई प्रमुख साधु संत भी शामिल होंगे, जिनमें साध्वी ऋतंभरा, चिदानंद मुनि जी, स्वामी ज्ञानानंद महाराज, राजू दास महाराज हनुमानगढ़ी, सुधांशु जी महाराज, बालक योगेश्वर दास, मृदुल कांत शास्त्री और संजीव कृष्ण ठाकुर शामिल हैं।
इस प्रकार है पद यात्रा का रूट
7 नवंबर: दिल्ली, कात्यायनी देवी मंदिर से शुरू
8 नवंबर: बहादुरगढ़, हरियाणा सीमा पर पड़ाव
9 नवंबर: फरीदाबाद, दशहरा मैदान एवं NIT फरीदाबाद, सीकरी
10–12 नवंबर: परथला राजकीय कॉलेज, मीठा गांव, होडल मंडी
13 नवंबर: हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा पार कर कोसीकलां, मथुरा में प्रवेश
15 नवंबर: बरसाना में प्रवेश
16 नवंबर: बांके बिहारी मंदिर वृंदावन में महासभा
पदयात्रा में भाग लेने वाले लोग न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश का हिस्सा बनेंगे, बल्कि यमुना संरक्षण और सनातन धर्म के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने में भी योगदान देंगे।