Himachal Rain (शिमला): हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में तबाही मचा दी है। भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के चलते घर, दुकानें और सड़कें बह गईं, इमारतें ढह गईं और कई इलाके जलमग्न हो गए। कुल 795 सड़कों के बंद होने, सैकड़ों बिजली ट्रांसफार्मरों और जलापूर्ति योजनाओं के ठप होने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
हालांकि सोमवार रात से किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात बेहद गंभीर हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, 20 जून से 25 अगस्त के बीच बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 156 लोगों की मौत हो चुकी है और 38 लोग लापता हैं।
सबसे अधिक प्रभावित जिले
मंडी, कुल्लू और चंबा जिलों में हालात बेहद खराब हैं। मंडी के बालीचौकी क्षेत्र में दो इमारतें गिर गईं, हालांकि पहले से खाली होने के कारण जानमाल की हानि नहीं हुई। कुल्लू के मनाली में ब्यास नदी ने एक होटल और चार दुकानों को बहा दिया। वहीं, किन्नौर के कांवी क्षेत्र में अचानक बाढ़ ने कई घरों को नुकसान पहुंचाया।
रेड अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने कांगड़ा, चंबा और लाहौल-स्पीति में ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। ऊना, बिलासपुर, सोलन, मंडी, हमीरपुर, कुल्लू और शिमला में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी कर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
स्कूल बंद, हाईवे जाम
जिलों के उपायुक्तों ने छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंडी, कांगड़ा, चंबा, कुल्लू, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर और सोलन में सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया है। शिमला में भी मंगलवार को सभी स्कूल-कॉलेज बंद रहे। कई राष्ट्रीय राजमार्ग, जैसे एनएच-3 (मंडी-धर्मपुर) और एनएच-305 (औट-सैंज) बंद पड़े हैं।
रिकॉर्ड बारिश और आर्थिक नुकसान
1 जून से 25 अगस्त तक राज्य में 703.7 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य औसत 577.9 मिमी होता है। यानी 22% अधिक। अगस्त में यह आंकड़ा सामान्य से 44% अधिक है। भारी बारिश और आपदाओं से राज्य को अब तक 2,394 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन टीमें राहत कार्यों में जुटी हुई हैं, लेकिन अगले 24 घंटे भारी बारिश की चेतावनी के साथ चिंताएं और बढ़ गई हैं।