operation sindoor :(नई दिल्ली): राज्यसभा में बुधवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई विशेष चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष एवं सदन में जेपी नड्डा ने विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी, पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 2004 से 2014 तक संप्रग सरकार के पास आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी।
नड्डा ने कहा कि तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने एक के बाद एक आतंकी हमलों के बावजूद कोई ठोस जवाबी कार्रवाई नहीं की और उसका रवैया केवल ‘डोजियर भेजने’ तक सीमित था। उन्होंने कहा, “उस समय सरकार अमावस्या की तरह थी अंधकार और निर्णयहीनता से भरी हुई। जबकि आज देश में पूर्णिमा की तरह उजाला है मोदी सरकार की स्पष्ट नीति और निर्णायक इच्छाशक्ति।”
आतंकवाद पर सीधी और सटीक प्रतिक्रिया
जेपी नड्डा ने कहा कि भारतीय सेना की क्षमता हमेशा रही है, लेकिन उस क्षमता को दिशा देने के लिए राजनीतिक नेतृत्व की दृढ़ता जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि आज देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वही इच्छाशक्ति मौजूद है, जो सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक में स्पष्ट दिखती है। उन्होंने कहा, “सेना को आदेश देना सरकार का कार्य होता है। सेना ने पहले भी साहस दिखाया है, लेकिन राजनीतिक संकोच के कारण पहले कार्रवाई नहीं हो सकी। अब जब नेतृत्व स्पष्ट है, तो आतंकवाद पर सीधी और सटीक प्रतिक्रिया दी जा रही है।”
पहलगाम हमले पर निर्णायक जवाब
जेपी नड्डा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने जो ठोस और तीव्र प्रतिक्रिया दी वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रूप में सामने आई, जो देश की संप्रभुता की रक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब सरकार पर संघर्षविराम को लेकर आरोप लगा रही है, लेकिन उसे खुद अपने इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए। “जो पार्टी पाकिस्तान को बार-बार बातचीत के लिए आमंत्रित करती रही, वह आज सरकार पर आत्मसमर्पण का आरोप लगा रही है यह हास्यास्पद है।
आतंकवाद पर दोहरी नीति का आरोप
नड्डा ने 2004 से 2014 तक हुए प्रमुख आतंकी हमलों की याद दिलाई जिनमें दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, पुणे, और जम्मू-कश्मीर जैसे स्थानों पर घातक घटनाएं शामिल थीं। उन्होंने कहा, “तत्कालीन सरकार ने केवल बयान दिए, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दस्तावेज भेजे, लेकिन आतंकवादियों को कोई सीधा संदेश नहीं दिया गया। वह काल खंड एक प्रकार से निष्क्रियता की मिसाल बन गया। नड्डा ने कहा कि इस सरकार का संकल्प है और आतंकवादी और उन्हें संरक्षण देने वाले- दोनों को नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में आतंकवाद के साथ बातचीत और संधि भी चलती रही जबकि इस सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते और न ही आतंकवाद एवं व्यापार साथ-साथ हो सकते।
सिंधु जल संधि और नीति में बदलाव
जेपी नड्डा ने मोदी सरकार की उस नीति का भी जिक्र किया जिसमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना, अटारी सीमा को बंद करना, और आतंकी ठिकानों पर सीधा हमला करना जैसे निर्णय शामिल हैं। उन्होंने कहा, “यह केवल सैन्य नहीं, कूटनीतिक मोर्चे पर भी भारत का आक्रामक रुख दर्शाता है।”
ऑपरेशन सिंदूर देश की है सफलता”
नड्डा ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है, जबकि यह केवल भाजपा की नहीं, बल्कि पूरे देश की सफलता है। “जिस देश की सीमाएं सुरक्षित हों, जहां आतंकी ठिकानों को जमींदोज किया गया हो, उस अभियान पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है।