ऑपरेशन सिंदूर दबाव में नहीं, तय लक्ष्यों की पूर्ति पर रोका गया”: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

Operation Sindoor: नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा के दौरान कहा कि यह कहना ‘‘गलत और निराधार’’ है कि इस अभियान को किसी बाहरी दबाव में रोका गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन के सभी लक्ष्य पूरी तरह प्राप्त कर लिए गए थे, इसलिए यह मिशन रोका गया, समाप्त नहीं किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अभियान तीनों सेनाओं के असाधारण समन्वय का प्रतीक रहा और इससे देश की सैन्य क्षमता, रणनीतिक संकल्प और आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट नीति का प्रदर्शन हुआ।

पाकिस्तान को दी सख्त चेतावनी

रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसे अब भी कोई गलतफहमी है, तो उसे भी पूरी तरह दूर कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर से सैन्य चैनल (डीजीएमओ स्तर) पर संपर्क कर कार्रवाई रोकने की अपील की गई थी। यह आग्रह भारत ने शर्तों के साथ स्वीकार किया कि अगर भविष्य में कोई दुस्साहस होता है, तो भारत और सख्त कदम उठाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को दोहराया जिसमें कहा गया था, ऑपरेशन सिंदूर रुका है, समाप्त नहीं हुआ है।”

विपक्ष पर साधा निशाना

रक्षा मंत्री ने विपक्ष, विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस सवाल पर जिसमें पूछा गया था कि इस अभियान में भारत के कितने विमान गिरे। राजनाथ सिंह ने कहा, “यह प्रश्न राष्ट्रीय भावनाओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। विपक्ष को पूछना चाहिए था कि कितने आतंकी मारे गए, कितनी दुश्मन संपत्ति नष्ट हुई। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए और कई आतंकी ढांचे पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए। “अगर पूछना है, तो यह पूछिए कि हमारे जांबाज सैनिकों को कोई क्षति हुई है? उत्तर है नहीं

22 मिनट में 9 ठिकानों को किया ध्वस्त

रक्षा मंत्री ने बताया कि 6-7 मई की रात को शुरू हुआ यह ऑपरेशन मात्र 22 मिनट चला, लेकिन इसमें भारतीय वायुसेना ने नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला कर उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य किसी क्षेत्र पर कब्जा करना नहीं था, बल्कि पाकिस्तान द्वारा वर्षों से पाले गए आतंकवाद की नर्सरी को खत्म करना था। सिंह ने यह भी बताया कि अभियान के बाद पाकिस्तानी सेना ने भारत पर जवाबी हमलों की कोशिश की, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने उन्हें पूरी तरह विफल कर दिया। “पाकिस्तान हमारे किसी अड्डे को छू नहीं पाया और हमारी कोई रणनीतिक संपत्ति प्रभावित नहीं हुई,” उन्होंने कहा।

माताओं और बहनों के सिंदूर का लिया गया बदला

राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ प्रतीकात्मक है हमारी सेनाओं ने माताओं और बहनों के सिंदूर का बदला लिया। उन्होंने बताया कि सेना के पास अंधेरी रात में की गई कार्रवाई के स्पष्ट सबूत भी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना का मनोबल नई ऊंचाई पर है और जवान देश की सीमाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वाभिमान की भी रक्षा कर रहे हैं।

आतंकवाद और वार्ता साथ नहीं चल सकते

राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की आतंकवाद को लेकर नीति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके लिए आतंकवाद केवल एक सुरक्षा रणनीति नहीं, बल्कि उसकी विदेश और राजकीय नीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की सेना और ISI आतंकवाद को छद्म युद्ध के रूप में इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत पड़ोसी देशों से मित्रता चाहता है, लेकिन जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देता रहेगा उससे कोई वार्ता नहीं हो सकती। आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते

खींच गई है नई लक्ष्मण रेखा

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने अब एक नई “लक्ष्मण रेखा” खींच दी है अब आतंकवाद को समर्थन देने वालों को कोई शरण नहीं मिलेगी। भारत अब किसी परमाणु ब्लैकमेलिंग या दबाव में नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि भारत अब हर नापाक हरकत का जवाब बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसी कठोर कार्रवाई से देगा। उन्होंने कहा, “हमने शांति की भाषा में लाहौर बस यात्रा की पेशकश की थी, लेकिन अब यदि जरूरत पड़ी तो सुदर्शन चक्र उठाएंगे। अपने संबोधन के में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की नीति संतुलन पर आधारित है हमने भगवान श्रीकृष्ण से सीखा है कि 100 गलतियां माफ करने के बाद भी धर्म की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र उठाना पड़ता है

BRICS में कश्मीर हमले की निंदा

राजनाथ सिंह ने BRICS सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक सफलता का भी जिक्र किया और बताया कि पहली बार चीन की उपस्थिति में कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा संयुक्त घोषणापत्र में की गई। उन्होंने कहा कि 2008 के मुंबई हमले के समय ऐसी कूटनीतिक पहल नहीं हो सकी थी, लेकिन मोदी सरकार के नेतृत्व में यह संभव हुआ।

धर्म की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र भी पड़ता है उठाना

अपने संबोधन के अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की नीति संतुलन पर आधारित है हमने भगवान श्रीकृष्ण से सीखा है कि 100 गलतियां माफ करने के बाद भी धर्म की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र उठाना पड़ता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि भारत की सरकार, सेना और संस्थाएं देश की रक्षा, संप्रभुता और अखंडता को लेकर पूरी तरह सजग हैं और हर जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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