India-UK Trade Agreement: (लंदन): ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने बताया कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी गुरुवार को ‘ब्रिटेन-भारत विजन 2035’ नामक नया रणनीतिक खाका पेश करेंगे। यह पहल रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने का लक्ष्य रखती है।
लैमी ने बताया कि ब्रिटेन-भारत मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मोदी-स्टार्मर वार्ता का केंद्र होगा। यह समझौता ब्रिटेन के लिए यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता माना जा रहा है। ब्रिटेन ने इस ऐतिहासिक समझौते से बाजार पहुंच में सुधार की उम्मीद जताई है। कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार में सालाना लगभग 34 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि होगी। यह समझौता न केवल व्यापार बढ़ाएगा, बल्कि रक्षा सहयोग और नवाचार के नए अवसर भी खोलेगा।”
आर्थिक लाभ और व्यापार वृद्धि
ब्रिटेन सरकार के अनुमान के अनुसार, इस मुक्त व्यापार समझौते से द्विपक्षीय व्यापार में 25.5 अरब पाउंड की वृद्धि होगी। इसके साथ ही ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 4.8 अरब पाउंड और मजदूरी में वार्षिक 2.2 अरब पाउंड की वृद्धि का अनुमान है। लैमी ने कहा, “यह समझौता यात्रा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों से आगे जाकर व्यापक आर्थिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे ब्रिटेन और भारत के बीच पुनर्जीवित साझेदारी के रूप में देखा, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रगति की ओर ले जाएगी।
विदेश मंत्री लैमी ने भारत को हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत 21वीं सदी की सबसे तेजी से उभरती महाशक्ति है, जिसकी आबादी लगभग 1.4 अरब है और जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भी है। लैमी ने जोर देकर कहा ब्रिटेन-भारत विजन 2035 और एफटीए दोनों देशों के बीच विकास, समृद्धि और सुरक्षा के लिए साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। यह साझेदारी आने वाले दशकों में दोनों देशों के लिए नई संभावनाएं और अवसर लेकर आएगी।”
दोनों देशों के बीच एक नए युग की शुरुआत
विदेश मंत्री लैमी ने कहा ब्रिटेन-भारत दृष्टिकोण 2035’ और एफटीए के माध्यम से दोनों देश रक्षा, तकनीकी नवाचार, ऊर्जा, और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। यह साझेदारी दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। यह द्विपक्षीय समझौता ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद का सबसे बड़ा और भारत के लिए अब तक का सबसे व्यापक समझौता है। यह दोनों देशों के बीच एक नए युग की शुरुआत है।