स्वच्छता सर्वेक्षण में भारत के इस शहर ने मारी बाजी, देखें लिस्ट

(नई दिल्ली):भारत सरकार के वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 के परिणामों की घोषणा गुरुवार को की गई, जिसमें इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छता में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर लगातार आठवीं बार जीतकर न केवल रिकॉर्ड कायम किया, बल्कि शहरी स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी स्थायी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण दिया।

इस वर्ष की रैंकिंग में गुजरात का सूरत दूसरे स्थान पर और नवी मुंबई तीसरे स्थान पर रहा। इन शहरों ने भी स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, नागरिक भागीदारी और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता में बेहतर प्रदर्शन किया है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने विजेताओं को किया सम्मानित

स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 के विजेताओं को सम्मानित करने के लिए नई दिल्ली में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेताओं को सम्मानित किया। इस मौके पर केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री श्री मनोहर लाल भी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ने देशभर के नगर निगमों और नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि “स्वच्छता सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि नागरिक कर्तव्य है।”

जनभागीदारी से संभव हुई सफाई में क्रांति

इंदौर की लगातार सफलता का मुख्य कारण है वहां की स्थानीय निकायों की सक्रियता, नागरिकों की भागीदारी, और आधुनिक तकनीकों का उपयोग। इंदौर ने गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण, प्लास्टिक के पुन: उपयोग, और जैविक खाद निर्माण जैसे क्षेत्रों में अग्रणी कार्य किया है।

स्वच्छ सर्वेक्षण देश के शहरी इलाकों की स्वच्छता, नागरिक सहभागिता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे मापदंडों पर आधारित एक राष्ट्रीय मूल्यांकन है। यह सर्वेक्षण केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा हर वर्ष आयोजित किया जाता है।

नोएडा को मिला प्रथम स्थान

तीन से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में नोएडा को प्रथम स्थान मिला, जबकि चंडीगढ़ और मैसूर दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। ये शहर भी नागरिक सहभागिता और सफाई व्यवस्था के उच्च स्तर के लिए प्रशंसा के पात्र रहे।

साफ-सफाई अब बन चुकी है जन-आंदोलन

मंत्री मनोहर लाल ने अपने संबोधन में कहा, “स्वच्छ भारत मिशन ने भारत के शहरी जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। शहरों में साफ-सफाई अब जन-आंदोलन बन चुकी है।” स्वच्छता सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल पुरस्कार देना नहीं, बल्कि स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाना है। इंदौर और अन्य विजेता शहरों की यह उपलब्धि दूसरों के लिए प्रेरणा है कि जनभागीदारी से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।

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