Independence Day 2024: वन नेशन वन इलेक्शन, सेकुलर कोड, यूसीसी और कृषि अर्थव्यवस्था को लेकर पीएम मोदी ने बताया आगे का विजन

Independence Day 2024: देश आज आजादी का 78वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद राष्ट्र को संबोधित किया। यह देश के नाम उनका लगातार 11वां संबोधन था और लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद उनका पहला संबोधन था। स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

इस बार पेरिस ओलंपिक 2024 में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों को भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बतौर अतिथि आमंत्रित किया गया था। अपने संबोधन के दौरान 98 मिनट तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुलकर सेकुलर कोड, रिफॉर्म, महिला अत्याचार, करप्शन, यूसीसी, मेडिकल एजुकेशन और कृषि अर्थव्यवस्था का जिक्र किया। पीएम मोदी का कहना था कि अब हम चाहते हैं कि आत्मनिर्भर बनें।

दुर्भाग्य से हमारे देश में आजादी के बाद लोगों को एक प्रकार के माई-बाप कल्चर से गुजरना पड़ा। सरकार से मांगते रहो, सरकार के सामने हाथ फैलाते रहो। हमने गवर्नेंस के इस मॉडल को बदला है। आज सरकार खुद लाभार्थियों के पास जाती है। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। पीएम मोदी का कहना था कि मैं भ्रष्टाचारियों से निपटकर रहूंगा। क्या कोई कल्पना कर सकता है कि मेरे देश में कुछ ऐसे लोग निकल रहे हैं, जो भ्रष्टाचार का महिमामंडन कर रहे हैं।

समाज में इस प्रकार के बीज बोने का प्रयास हो रहा है, वो स्वस्थ समाज के लिए चुनौती है। भ्रष्टाचारियों से दूरी बनाना सही होता है, उसका महिमामंडन नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी का कहना था कि मैं देशवासियों कहना चाहता हूं कि हम नेकनीयत से राष्ट्र के प्रति अपने समर्पण से हम विपरीत मार्ग पर जाने वाले लोगों के दिल जीतेंगे।

राष्ट्र के सपनों को साकार करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हम बदनियत वालों को नेक नियत से जीतेंगे। हमारा हर देशवासी भ्रष्टाचार की दीमक से परेशान रहा है। अन्याय के प्रति उसका गुस्सा राष्ट्र की प्रगति में रुकावट देता है। मैंने इसके लिए काम किया, मुझे अपनी प्रतिष्ठा भी चुकानी पड़े तो चुकाऊंगा।

पीएम मोदी का कहना था कि हम विश्व में जब समृद्ध थे, तब भी हमने दुनिया को युद्ध नहीं दिया। मैं विश्व समुदाय को विश्वास दिलाता हूं कि आप भारत के संस्कारों को समझिए। भारत के हजारों साल के इतिहास को समझिए। हमें संकट मत मानिए। इस भूमि में विश्व कल्याण का सामर्थ्य है। चुनौतियों को चुनौती देना हमारी फितरत में है। हम संकल्पों की पूर्ति के लिए देशवासियों का भाग्य बदलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

पीएम ने बांग्लादेश की हिंसा का भी जिक्र किया और कहा, बांग्लादेश में अशांति के बीच हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर 140 करोड़ भारतीय भी चिंतित हैं। भारत की सदैव यही इच्छा रही है कि उसके पड़ोसी देश समृद्धि और शांति के मार्ग पर चलें। एक पड़ोसी देश के तौर पर बांग्लादेश में जो कुछ भी हुआ है, मैं उससे जुड़ी चिंता को समझ सकता हूं। मुझे उम्मीद है कि वहां स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो जाएगी।

देश के 140 करोड़ देशवासियों की चिंता वहां हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में भारत अपनी ‘विकास यात्रा’ में “बांग्लादेश के लिए शुभकामनाएं’ देता रहेगा क्योंकि हम मानव जाति के कल्याण के बारे में सोचते हैं।

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सेक्युलर सिविल कोड पर बोले पीएम

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर चर्चा की है और अनेक बार आदेश दिए हैं। क्योंकि देश का एक बहुत बड़ा वर्ग मानता है कि जिस सिविल कोड को लेकर हम जी रहे हैं, वो सिविल कोड सचमुच में एक कम्युनल और भेदभाव करने वाला सिविल कोड है।

अब हमें सेकुलर सिविल कोड की तरफ जाना होगा। पीएम मोदी का कहना था कि हमारे संविधान की भावना कहती है कि इस विषय पर देश में गंभीर चर्चा हो, जो कानून धर्म के आधार पर देश को बांटते हैं। ऐसे कानूनी आधुनिक समाज नहीं बनाते। देश के संविधान निर्माताओं का भी ये सपना था। जो कानून धर्म के आधार पर देश को बांटते हैं, जो ऊंच-नीच का कारण बनते हैं, वैसे कानूनों के लिए देश में कोई जगह नहीं हो सकती। देश में 75 सालों से कम्युनल सिविल कोड है।

विपक्ष हुआ हमलावर

बता दें कि, पीएम मोदी ने लाल किले से दिए भाषण पर विपक्ष हमलावर है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पीएम मोदी संविधान की शपथ लेते हैं और फिर बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा लिखे गए नियमों को सांप्रदायिक बताते हैं। वह एक तरह से अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ बोलते हैं और कहते हैं कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में आतंकवादी हमले हुए थे। हम जानना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री ने बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। केन्द्र सरकार को देश को बताना चाहिए कि आखिर बांग्लादेश को लेकर क्या कदम उठाए गए।

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