SC on VVPAT Election Commission: आम चुनाव के दूसरे चरण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने वीवीपैट वेरिफिकेशन की मांग को लेकर दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाच चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया सामने आई है। आयोग का कहना है कि आम चुनाव एक लंबी प्रक्रिया होती है और हम इसे पूरी सुचिता और ईमानदारी के साथ कराते हैं।
आगे ईसी ने कहा कि हम सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं और उम्मीद करते हैं कि अब किसी तरह का ईवीएम पर संदेह पैदा नहीं किया जाएगा। ईवीएम की सुचिता पर रोना अब पुराना अध्याय बन गया है। हमें इसे पीछे छोड़कर भविष्य के लिए मिलकर काम करना होगा। चुनाव आयोग पूरी सुचिता, निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ लोकतंत्र का यह पर्व मनाने के लिए हर एक नागरिक के प्रति प्रतिबद्ध है।
आगे चुनाव आयोग ने कहा कि, कोर्ट के इस फैसले के बाद अब किसी को शक नहीं रहना चाहिए। अब पुराने सवाल खत्म हो जाने चाहिए। सवालों के वोटर के मन में शक होता है। चुनाव सुधार भविष्य में भी जारी रहेगा। हम किसी भी तरह की आसमंजस की स्थिति पैदा नहीं होने देंगे। साथ ही साथ ईवीएम की विश्वसनीयता बनाए रखने पर कार्य जारी रहेगा।
जानें सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में दो टूक कहा कि मतदान ईवीएम मशीन से किया जाएगा। ईवीएम और वीवीपैट का 100 फीसदी मिलान नहीं किया जाएगा। 45 दिनों तक वीवीपैट की पर्ची सुरक्षित रहेगी। यह पर्चियां प्रत्याशियों के हस्ताक्षर के साथ सुरक्षित रखी जाएगी। कोर्ट का निर्देश है कि चुनाव के बाद सिंबल लोडिंग यूनिटों को भी सीलकर सुरक्षित किया जाए।
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यह भी निर्देश दिया गया है कि उम्मीदवारों के पास नतीजों की घोषणा के बाद टेक्निकल टीम द्वारा ईवीएम के माइक्रो कंट्रोलर प्रोग्राम की जांच कराने का विकल्प होगा, जिसे चुनाव घोषणा के सात दिनों के भीतर किया जा सकेगा। यह फैसला सुनाते हुए जस्टिस खन्ना ने कहा कि वीवीपैट वेरिफिकेशन का खर्चा उम्मीदवारों को खुद ही उठाना पड़ेगा।
अगर किसी स्थिति में ईवीएम से छेड़छाड़ की गई या ईवीएम को किसी तरह का नुकसान पहुंचा तो उसका हर्जाना भी भरना पड़ेगा। वहीं, इस दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि किसी सिस्टम पर आंख मूंदकर अविश्वास करने से संदेह ही पैदा होता है। लोकतंत्र का मतलब ही विश्वास और सौहार्द बनाए रखना है।