संतोष कुमार सिंह
चंड़ीगढ़: हरियाणा के कई जिलों में बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे सभी किसानों को फसलों के हुए नुकसान के लिए मुआवजे और क्षतिपूर्ती का प्रावधान है लेकिन नुकसान इतना बड़ा हुआ है कि सरकार के प्रावधान नाकाफी साबित हो रहे थे। ऐसे में मनोहर लाल की सरकार ने किसानों की हित में बड़ा फैसला लिया है जिसकी मांग किसान भाई कर रहे थे।
क्या है प्रावधान
हरियाणा सरकार ने बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत दी है। सरकार की ओर से क्षतिपूर्ति पोर्टल पर 5 एकड़ की शर्त को हटा दिया गया है। इतना ही नहीं किसानों को बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान की रिपोर्ट 15 मार्च तक पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। कहा जा रहा है कि हरियाणा में बारिश व ओलावृष्टि से 8 लाख एकड़ फसल में 25 फीसदी नुकसान हुआ है।
इसके पहले किसान सिर्फ 5 एकड़ तक नुकसान की रिपोर्ट ही क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपलोड कर पा रहे थे। यही कारण है कि किसानों की सरकार से मांग थी कि 5 एकड़ की सीमा को खत्म किया जाये ताकि किसान फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति ले सकें। किसान चाहते थे कि सरकार को किसानों को वास्तविक एकड़ जमीन अपलोड करने की अनुमति मिले, जहां उन्हें नुकसान हुआ है।
ज्यादातार किसानों का यह कहना था कि जिन किसानों का 5 एकड़ से ज्यादा नुकसान हुआ है, उन्हें बहुत दिक्कत आ रही थी। बड़ी संख्या में ऐसे किसान थे जिनके जोत की सीमा 5 एकड़ से उपर थी और फसलों को भारी नुकसान हुआ था, वे पोर्टल पर अपलोड नहीं कर पा रहे थे जिसको लेकर उनमें भारी आक्रोश था। अब सरकार ने इस सीमा को बढ़ा दिया है और किसान भाई 15 मार्च तक अपने फसल नुकसान के दावे पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं।