Haryana: मनोहर सरकार के खिलाफ कांग्रेस का ​अविश्वास…आंकड़ों के भरोसे नहीं, बहस के भरोसे हैं हुड्डा

संतोष कुमार सिंह

Haryana Budget Session: हरियाणा में विधानसभा सत्र चल रहा है। विपक्षी कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव लाया है। आंकड़ों के गणित को देखें तो मनोहर लाल की सरकार को इस कांग्रेस द्वारा जताये गये अविश्वास से कोई खतरा नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया?

जवाब ये है इस बहाने भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मनोहर लाल सरकार को सदन में घेरने की रणनीति है। मजबूती से सरकार चला रहे मनोहर लाल दो मोर्चों पर घिरे नजर आते हैं एक तो चुनाव सर पर है दूसरा प्रदेश में किसान आंदोलन चल रहा है।

ऐसे में हुड्डा की रणनीति ये है कि बजट सत्र के दौरान सरकार को किसान आंदोलन पर घेरा जाये और चुनावी तैयारियों को धार दी जाये। यही कारण है कि कांग्रेस ने मनोहर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया और विगत मंगलवार को हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने मनोहर लाल  के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को मंगलवार को स्वीकार कर लिया था।

आज अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हुई विपक्षी कांग्रेस ने भाजपा-जेजेपी सरकार पर आरोप लगाया है कि हर मोर्चे पर ये सरकार फेल रही है। सीईटी, भर्तियों में धांधली, बेरोजगारी, फसलों की एमएसपी और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर इस बार कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। इस दौरान कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा ने खट्टर सरकार पर सभी मोर्चों में विफल रहने का आरोप लगाया है।

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वार्ता से नहीं निकली राह

किसान आंदोलन से निपटन  के लिए सरकार लगातार ये प्रयास कर रही है कि बातचीत से हल निकल जाये लेकिन कोई हल निकलता दिख नहीं रहा है। इसको लेकर मनोहर सरकार परेशान है। तभी तो विधानसभा में मनोहर लाल ने कहा कि  आज हम ऐसे मोड़ पर खड़े हैं कि किसान संगठनों ने कुछ ऐसे इश्यू उठाए हैं, जिन पर वार्ता चल रही है। इस मामले पर मुझे गंभीरता से विचार करना पड़ रहा है, क्योंकि आज भी तनाव बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि वे सदन में 28 फरवरी को किसानों के विषय पर अपनी बात रखेंगे और इसी  दिन हरियाणा विधानसभा के बजट सेशन का आखिरी दिन है। जाहिर है कांग्रेस की रणनीति अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मनोहर सरकार की मुश्किलें बढ़ाने की है। क्योंकि हरियाणा पंजाब के सभी बॉर्डरों पर माहौल तनावपूर्ण है। इस बीच हरियाणा के किसान भी आंदोलन में शामिल होने को तैयार बैठे हैं।

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