Rajasthan Deputy CM: हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद सभी राज्यों में नई सरकारों का गठन हो चुका है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब हुई। छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने आदिवासी चेहरा, मध्य प्रदेश में ओबीसी चेहरा और राजस्थान में ब्राह्मण चेहरा उतारकर तीनों राज्यों में अन्य जातियों के दो-दो डिप्टी सीएम बनाए हैं।
कोर्ट में जनहित याचिका दायर
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे संविधान में उपमुख्यमंत्री यानी डिप्टी सीएम का कोई पद ही नहीं है। अब इसी को लेकर जयपुर के एक वकील ओम प्रकाश सोलंकी ने कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। याचिका राजस्थान के दो डिप्टी सीएम दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा के पदों को लेकर दाखिल की गई है।
बता दें कि, वकील ओम प्रकाश सोलंकी ने राजस्थान हाईकोर्ट में दायर की गई अपनी जनहित याचिका में आरोप लगाए है कि संविधान में उपमुख्यमंत्री जैसा कोई पद नहीं है। यह एक राजनीतिक पोस्ट है और यह असंवैधानिक है।
क्या कहता है संविधान ?
अगर कानून की बात की जाए तो संविधान के अनुच्छेद 163 (1) में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्री परिषद होगा जो अपने कार्यों के निष्पादन के लिए राज्यपाल को सलाह देगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संवैधानिक तौर पर किसी भी राज्य में डिप्टी सीएम का कोई कोनसेप्ट ही नहीं है तो राज्य की सियासत में डिप्टी सीएम का दर्जा और काम क्या होता है।
दरअसल, ये तो आप समझ गए होंगे सरकार डिप्टी सीएम इसलिए बनाती है ताकि राजनीतिक पार्टियां उस राज्य में सभी धर्मों और जाति के लोगों को खुश कर सके और राज्य में राजनीतिक स्थिरता और मजबूती आ सके। लेकिन ऐसे में प्रदेश में कितने भी डिप्टी सीएम हो लेकिन इससे मुख्यमंत्री की शक्तियों पर कोई असर नहीं होता।