संतोष कुमार सिंह
नई दिल्ली: पुरानी कहावत है जैसा अन्न, वैसा मन। लेकिन समय के साथ जिस तरह की बीमारियां समाज में फैल रही है और खानपान की बिगड़ती आदतों की वजहों से हमारा स्वास्थ्य जिस तरह से प्रभावित हो रहा है वह निश्चित रूप से चिंता का विषय है। लेकिन इसका निदान भी है और वो है मोटा अनाज यानी श्रीअन्न। हमारी पुरानी पीढ़ी तो श्रीअन्न का इस्तेमाल ही किया करती थी और स्वस्थ जीवन यापन करती थी। भारत सरकार के प्रयास से मिलेट्स यानी मोटे अनाज को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हरेक वैश्विक मंच से इसके फायदे बताते रहे हैं। भारत की अध्यक्षता में हुए जी 20 की बैठकों में भी श्रीअन्न यानी मिलेट्स पड़ोसा गया और विदेशी मेहमानों को पसंद भी आया है।
लेकिन इसको लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी हैं। उन्हीं भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को स्वस्थ जीवन का सूत्र देने के लिए आगामी दिनांक 5, 6 और 7 नवंबर 2023 को “गांधी दर्शन” राजघाट में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके। 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्घाटन 5 नवंबर को उत्तरप्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रसाद शाही करेंगे। समारोह के आखिरी दिन यानी 7 नवंबर को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल महामहिम शिव प्रताप शुक्ल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन पूर्व राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा द्वारा स्थापित अवसर ट्रस्ट, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और गांधी दर्शन के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण शिविर में देश भर से 1000 से अधिक प्रतिभागियों के भाग लेने की संभावना है। प्रशिक्षण शिविर में मोटे अनाज के फायदे और इसके बनाने और खाने की विधि भी विस्तार बताई जाएगी।
क्या है खास…
अवसर ट्रस्ट और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र व गांधी दर्शन द्वारा आयोजित इस तीन दिवसिय प्रशिक्षण शिविर में मिलेट्स मैन के नाम से मशहूर पद्मश्री डॉ खादर वली प्रशिक्षण देंगे और बताएंगे कि किस प्रकार हम मोटे अनाज से किसी भी गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज कर सकते हैं। डॉ खादर खाद्य और पोषण विशेषज्ञ हैं, जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायराइड, हृदय रोग आदि जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए मिलेट्स के सेवन की कारगर विधि बताते हैं। डॉ० खादर प्रशिक्षुओं को यह बताएंगे कि कैसे आहार को ही अपनी औषधि बना सकते हैं।
डॉ खादर वली के अनुभव से मिलेगा लाभ
आंध्रप्रदेश के डॉ खादर वली इन दिनों मैसूर में रह रहे हैं और कृषि विज्ञान पर शोध के साथ देश के किसानों को मोटे अनाज उगाने के लिए तो प्रेरित कर रहे हैं, साथ ही लोगों को भी गेहूं चावल की जगह मोटे अनाज का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
एक स्वतंत्र वैज्ञानिक 66 वर्षीय डॉ वली ने खाद्य और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत सारी परियोजनाओं पर काम किया है। वे 20 सालों से मोटे अनाज की पैरवी के साथ ही गेहूं, चावल और चीनी के नुकसान से भी लोगों को अवगत करा रहे हैं। उनका मानना है कि लोगों के जीवन शैली में विकार ऐसे ही भोजन से आ रहे हैं। डॉ वली ने अपने चुने पांच मोटे अनाजों का मिश्रण को “श्रीधान्य” नाम दिया इसके लिए उन्होंने खडू कृषि पद्धति को प्रोत्साहित किया। इनके जरिए उन्होंने हजारों लोगों का इलाज भी किया। कई बीमारियों को ठीक करने में मददगार इन मोटे अनाजों का उत्पादन आने वाले में क्रांतिकारी रूप से बढ़ेगा जिसका फायदा भारत उठा सकता है। वह मिलेट्स खाने के फायदों की वकालत कर रहे हैं। वह मिट्टी की उर्वरता को बचाने और सही प्रकार की कृषि पद्धतियों का प्रयोग जल संचय और पर्यावरण समृद्धि पर भी सार्थक कार्य कर रहे हैं। इस दौरान देश भर के 2 दर्जन मिलेट्स उत्पादकों का स्टाल भी लगाया जा रहा है।