जमींदोज होगा मुखर्जी नगर का सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट, सीबीआई करेगी मामले की जांच

संतोष कुमार सिंह

नयी दिल्ली: मुखर्जी नगर का सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट को जल्द ही जमींदोज कर दिया जायेगा। और जमींदोज कोई और नहीं बल्कि डीडीए द्वारा किया जायेगा और निर्माण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कॉन्ट्रैक्टरों के खिलाफ अब सीबीआई जांच करेगी। कहा जा रहा है कि मुखर्जी नगर में बना सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट का स्ट्रक्चर काफी कमजोर है। जिसकी लोग शुरुआत से शिकायत करते रहे हैं। यह अपार्टमेंट 2007-09 में बना था। इसके बाद 2011-12 में यह लोगों को अलॉट किया गया। कुछ ही समय बाद इस अपार्टमेंट को असुरक्षित घोषित कर दिया गया। इस अपार्टमेंट में 336 एचआईजी और एमआईजी के फ्लैट्स हैं।

इस पर एलजी ने संज्ञान लेते हुए 24 जनवरी को निर्देश दिया था कि लापरवाह अधिकारियों, कॉन्ट्रैक्टरों, बिल्डरों और कंस्ट्रक्शन एजेंसी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करवाए जाएं और भ्रष्टाचार की जांच की जाए। एलजी के निर्देश के बाद डीडीए ने सीबीआई में इस मामले की शिकायत की है। अभी तक जांच के दायरे में उस समय के डीडीए के तीन मेंबर्स (इंजीनियरिंग), 6 चीफ इंजीनियर, 9 सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, 9 एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, 4 असिस्टेंट इंजीनियर और 8 जूनियर इंजीनियर हैं।

डीडीए ने इस मामले में सीबीआई में शिकायत दी है और एफआईआर दर्ज करने की अपील की है। अपनी शिकायत में डीडीए ने कॉन्ट्रैक्टर विनर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, ग्रोवर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, टेस्टिंग एजेंसी भारत टेस्ट हाउस और दिल्ली टेस्ट हाउस के साथ डीडीए के विभिन्न अधिकारियों पर आपराधिक मामले दर्ज करने की अपील की है। शिकायत में कहा गया है कि इन्होंने लोगों की जान को खतरे में डाला है।

सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट में बने फ्लैट लोगों को 2011-12 में अलॉट किए गए थे। इसके तुरंत बाद लोगों ने इसमें निर्माण संबंधी दिक्कतों की शिकायतें डीडीए को करना शुरू कर दिया था। इसके बाद 2021-22 में आईआईटी दिल्ली ने एक स्टडी की, जिसमें इस अपार्टमेंट को असुरक्षित करार दिया गया और इसे तुरंत खाली करवाकर जमींदोज करने की सलाह दी गई। एलजी ने इस मामले में डीडीए को अपार्टमेंट का रीडिवेलपमेंट और लोगों के पुनर्वास का प्लान तैयार करने के आदेश दिए हैं।

डीडीए की मानें तो अपार्टमेंट की आरडब्ल्यूए से बातचीत के बाद ध्वस्तीकरण का फैसला लिया गया है। फ्लैट मालिक ध्वस्तीकरण को लेकर पहले अपना अनापत्ति पत्र डीडीए को देंगे। इसके बाद डीडीए ध्वस्तीकरण के लिए एजेंसी से अनुबंध करेगा। ध्वस्तीकरण से अपार्टमेंट के करीब एक हजार से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे।

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