शुभम रावत-
नूंह:हरियाणा की मनोहर सरकारनूंह में 31 जुलाई को ब्रजमंडल यात्रा के दौरान हुई हिंसा की घटना के बाद से ही एक्शन मोड में आ गई थी।हिंसा के आरोपियों के घर परबुलडोजर कीकार्रवाई की गई थी। उन घरों को जमींदोज कर दिया गया था जिन घरों से हिंसा के दौरान ईट-पत्थर चलाए गए थे।
हिंसा के 3 दिन बाद यानि 2अगस्त से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, नूंह प्रशासन और जिला योजना विभाग की टीमों ने नूंह में अवैध निर्माण गिराने की कार्रवाई शुरू की थी।इस दौरान 162 स्थायी और 591 अस्थायी निर्माण गिराए गए।
हरियाणा सरकार ने अब दावा किया है कि नूंह हिंसा के बाद निर्माण गिराने की कार्रवाई में NGT की गाइडलाइन और हाई कोर्ट के पूर्व में दिए गए फैसलों का पालन किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार नूंह में 70 प्रतिशत मुस्लिमों और 30 प्रतिशत हिंदुओं के निर्माण गिराए गए हैं। हाई कोर्ट ने यह रिपोर्ट रजिस्ट्री ब्रांच से भेजने के निर्देश दिए हैं।
HC ने निर्माण गिराने पर लगाई थी रोक
हाई कोर्ट ने निर्माण गिराने की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।जस्टिस जी.एस संधावालिया और जस्टिस हरप्रीत कौर जीवन की बेंच ने सू मोटो नोटिस के आधार पर 7 अगस्त कोबुलडोजर कीकार्रवाई को रोकने का आदेश दिया था। इसके बाद11 अगस्त को इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच के पास गई। उन्होंने मामला सू मोटो का होने के चलते सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस द्वारा की जाएगी।