संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: संसदीय इतिहास में संसद के मानसून सत्र-2023को विपक्ष के सर्वाधिक सदस्यों के अनिश्चितकालीन निलंबन के लिए भी याद किया जायेगा। आपको याद होगा कि संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में कांग्रेस के नेता व नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी को असंसदीय व्यवहार के लिए निलंबित किया गया था। इसके बाद यह तय हुआ कि संसद की विशेषाधिकार समिति अधीर रंजन चौधरी के निलंबन की जांच करेगी।
आज इस बाबत संसद के विशेषाधिकार समिति की बैठक हुई। इस विशेषाधिकार समिति ने यह फैसला लिया कि कांग्रेस नेता को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जायेगा। विशेषाधिकार समिति की अगली बैठक 30अगस्त को होनी है। सूत्रों की माने तो अधीर रंजन चौधरी को 30अगस्त को विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होने के लिए कहा जा सकता है।
क्या था मामला
दरअसल मानसून सत्र के दौरान अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर टिप्पणी की थी। अधरी ने कहा था कि मणिपुर और हस्तिनापुर में कोई फर्क नहीं है। पीएम मोदी नीरव मोदी बनकर चुप्पी साधे हुए हैं। जब सत्ता पक्ष ने इस पर अपना विरोध जताया तो अधीर रंजन चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि नीरव का मतलब शांत रहना होता है और उनका मकसद प्रधानमंत्री का अपमान करना नहीं था।
हालांकि संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने अधीर रंजन चौधरी की टिप्पणी पर उनके निलंबन का प्रस्ताव पेश किया, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया था।
महत्वपूर्ण बात यह है कि मानसून सत्र में न सिर्फ नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी को बल्कि विपक्ष के कई अन्य सांसदो को भी निलंबित किया गया था। इन सांसदों में राज्यसभा में आप के सांसद संजय सिंह और राघव चड्ढा को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित किया गया। अनिश्चित काल इसलिए कि इनके निलंबन के मामले को विशेषाधिकार हनन के मामलों की समिति देखेगी-परखेगी और अपने सुझाव संसद को भेजेगी। फिर सम्बद्ध सदन फ़ैसला करेंगे। इन सबका कोई समय निश्चित नहीं है। इसलिए निलंबन अनिश्चितकालीन मानी जायेगी। इससे पहले जालंधर उपचुनाव जीतकर लोकसभा के नये सदस्य बने सुशील कुमार रिंकू को मानसून सत्र तक के लिए निलंबित किया गया था।