शुभम रावत-
नई दिल्ली: चंद्रयान-3 सोमवार को चांद की चौथी कक्षा में पहुंच गया है। 5 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद की पहली ऑर्बिट में पहुंचा था। उसके बाद अब तक इसकी दो बार ऑर्बिट बदली जा चुकी है। अब यह 177 किमी की दूरी पर है।
चांद की चौथी कक्षा में पहुंचाChandrayaan-3
चंद्रयान अभी 150 km x 177 km वाली ऑर्बिट में घूम रहा है। इसके बाद 16 को ऑर्बिट बदला जाएगा। इसरो ने 14 अगस्त की सुबह करीब पौने बारह बजे चंद्रयान-3 के थ्रस्टर्स को ऑन किया था। इंजनों को करीब 18 मिनट तक के लिए ऑन किया गया था। 17 अगस्त को प्रोपल्शन और लैंडर मॉड्यूल अलग होंगे। इसके बाद 18 और 20 को लैंडर की डीऑर्बिटिंग होगी। फिर 23 अगस्त को इसकी लैंडिंग होगी।
ISRO चांद की ऑर्बिट में चंद्रयान-3 के इंजनों से रेट्रोफायरिंग करवा रहा है। जिसका मतलब यह है कि इसकी गति धीमी करने के लिए उलटी दिशा में यान को चला रहा है। इसके बाद 16 अगस्त को पांचवीं कक्षा बदली जाएगी।
रूस ने भी लॉच किया मिशन मून
रूस ने 47 साल बाद अपना मून मिशन भेजा है। 11 अगस्त की सुबह अमूर ओब्लास्ट के वोस्तोनी कॉस्मोड्रोम से Luna-25 Lander मिशन लॉन्च किया गया है। यह रॉकेट करीब 46.3 मीटर लंबा है। इसका व्यास 10.3 मीटर है। इसका वजन 313 टन है। चार स्टेज के रॉकेट ने Luna-25 लैंडर को धरती के बाहर एक गोलाकार ऑर्बिट में छोड़ा। जिसके बाद यह स्पेसक्राफ्ट चांद के हाइवे पर निकल गया। इस हाइवे पर ही 5 दिन की यात्रा करेगा। इसके बाद चांद के चारों तरफ 7-10 दिन चक्कर लगाएगा।बताया जा रहा है कि चद्रयान-3 से पहले यह चांद की सतह पर लैंड करेगा।