लोकसभा चुनाव 2024ः क्या बिहार छोड़ यूपी से चुनाव लड़ेंगे नीतीश कुमार

नई दिल्लीःबिहार में भाजपा को छोड़ लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ हाथ मिलाकर राजनीतिक पंडितों को चौंकाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या आगामी लोकसभा चुनाव में फिर अपनी नई सियासी चाल से सबको चौंकाने वाले हैं? इन दिनों मीडिया में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि नीतीश इस बार लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और वो भी बिहार नहीं बल्कि दूसरे राज्य से। लोकसभा चुनाव 2024को लेकर अपनी रणनीति बनाने में जुटे नीतीश कुमार के उत्तर प्रदेश के फूलपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है। बताया जा रहा है कि इसके लिए जदयू फूलपुर संसदीय क्षेत्र में सर्वे भी करा रही है।

पटेल बाहुल्य संसदीय क्षेत्र है फूलपुर

फूलपुर संसदीय क्षेत्र को पटेल बाहुल्य माना जाता है। यहां लगभग 19.75लाख मतदाता हैं और राजनीतिक जानकार कहते हैं कि करीब चार लाख पटेल मतदाताओं का एकतरफा साथ जिसको मिलता है वो अन्य दलों के उम्मीदवारों पर भारी साबित हो जाता है। इस संसदीय क्षेत्र की एक खास बात यह भी है कि यहां से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहल लाल नेहरू भी चुनाव लड़ चुके हैं। ऐसे में कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार यहां से लोकसभा चुनाव लड़कर राष्ट्रीय स्तर के नेता के रूप में अपनी छवि स्थापित करना चाहते हैं।

क्या जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह को राष्ट्रीय महासचिव बनाना नीतीश की इसी रणनीति का हिस्सा था

जुलाई 2022में नीतीश कुमार ने जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह को अपनी पार्टी जदयू का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर यूपी के पूर्वांचल को साधने के लिए बड़ा सियासी दांव चल दिया था। दो बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके धनंजय सिंह को अहम जिम्मेदारी मिलने से लोकसभा चुनाव में जदयू को मजबूती मिलने की पहले से उम्मीद जताई जा रही है। पिछले कुछ दिनों से फूलपुर संसदीय क्षेत्र में तीर-कमान लगे झंडे वाली गाड़ियां दौड़ने लगी हैं। बताया जा रहा है कि जदयू की एक टीम यहां काम कर रही है और पटना कार्यालय में अपनी रिपोर्ट दे रही है। इन सियासी समीकरण को देखकर सियासी गलियारों में अब यह चर्चा भी है कि क्या जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह को राष्ट्रीय महासचिव बनाना नीतीश की इसी रणनीति का हिस्सा था।

20साल बाद लोकसभा चुनाव लड़ेंगे नीतीश कुमार

नीतीश कुमार वर्ष 2004में हुए लोकसभा चुनावों में बिहार के बाढ़ एवं नालंदा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। नालंदा सीट से तो वो चुनाव जीत गए थे, लेकिन बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से हार गए थे। यदि नीतीश उत्तर प्रदेश के फूलपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो करीब 20साल बाद वो फिर लोकसभा चुनाव के मैदान बतौर उम्मीदवार खड़े दिखेंगे।

पटेल बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद सोनेलाल पटेल यहां से कभी चुनाव नहीं जीत पाए

जिस फूलपुर संसदीय क्षेत्र को पटेल बाहुल्य माना जाता है उसे महज जाति समीकरण के आधार पर समझना आसान नहीं है। क्योंकि पटेल बाहुल्य इस क्षेत्र से अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल कभी चुनाव नहीं जीत पाए। वहीं, वाराणसी के महापौर रह चुके कौशलेंद्र पटेल उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद हुए चुनाव में जब भाजपा की तरफ से मैदान में उतरे थे तो उन्हें भी समाज वादी पार्टी के नागेंद्र पटेल से शिकस्त मिली थी।

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