नई दिल्लीःकेंद्र सरकार ने कहा है कि आधार नहीं होने के कारण छात्रों को प्रवेश देने या दूसरी अन्य सुविधाओं से स्कूल मना नहीं कर सकते। इस संबंध में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआई) ने भी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें साफ कहा गया है कि आधार संख्या के अभाव में किसी बच्चे को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है।
सोमवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर सहित दूसरे अन्य सांसदों ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से पूछा था कि क्या राज्यों में सरकारी स्कूलों में बच्चों के दाखिले के लिए आधार अनिवार्य कर दिया गया है। इन सांसदों का कहना था कि प्रत्येक राज्य अब अनिवार्य रूप से इसकी मांग कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इसकी अनिवार्यता पर रोक लगा रखी है। ऐसे में राज्य ऐसा कैसे कर सकते हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने दिया ये जवाब
सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, बावजूद इसके शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे स्कूलों में छात्रों को प्रवेश देने के लिए इसे अनिवार्य नहीं कर सकते हैं। इस संबंध में मंत्रालय ने एक अधिसूचना भी जारी की है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि स्कूलों में दाखिला या फिर केंद्र द्वारा चलाई जा रही किसी भी योजना के लाभ से ऐसे किसी छात्र को वंचित नहीं किया जा सकता, जिसके पास आधार नहीं है।
प्रमाणीकरण के लिए दूसरे दस्तावेज का इस्तेमाल किया जा सकता है
शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यदि किसी छात्र के पास आधार नहीं है, तो प्रमाणीकरण के लिए दूसरे दस्तावेज का इस्तेमाल किया जा सकता है। आधार के लिए छात्रों को बाध्य नहीं किया जा सकता है। आपको बता दें कि स्कूलों में आधार की अनिवार्यता को लेकर यह सवाल ऐसे समय में उठा है, जब छात्रवृत्ति सहित दूसरी योजनाओं की गड़बड़ियों को रोकने और छात्रों को सीधे उसका लाभ पहुंचाने के लिए उन्हें आधार से जोड़ा जा रहा है। हालांकि स्कूलों में आधार की अनिवार्यता का मुद्दा जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था तो मामले की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने आधार को अनिवार्य बनाए जाने पर रोक लगा दी थी।