पटना: चालू वित्त वर्ष 2023-2024 को चार महीने खत्म होने वाले हैं, लेकिन अभी तक बिहार को मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के लिए केंद्र से मिलने वाली दो हजार करोड़ की राशि भुगतान नहीं की गई है। राज्य में अभी तक पिछले साल वाली राशि से काम चलाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, अब राज्य के पास मिड डे मिल के संचालन के लिए खर्च होने वाली न्यूनतम राशि बची है जो बहुत जल्द खत्म हो सकती है। अगर केंद्र से राशि प्राप्त होने में और एक महीने की देरी हुई तो राज्य पर वित्तीय भार बढ़ सकता है।
दरअसल, मध्यान्ह भोजन योजना केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम है। इसमे लगने वाली राशि केंद्र द्वारा प्राप्त कराई जाती है। केंद्र सरकार द्वारा राज्य को हर साल 2 हजार करोड़ की राशि दी जाती है। यह राशि किश्तों में दी जाती है जो वित्तीय वर्ष की प्रत्येक तिमाही में पांच सौ करोड़ देने होते हैं। ऐसे में राज्य को वित्त वर्ष की पहली किश्त मिल जानी चाहिए, लेकिन अभी तक राज्य को कोई राशि नहीं दी गई है। किश्त में देरी की वजह केंद्र ने तकनीकी बताई है।
250 करोड़ से कम होने पर मिलेगा केंद्रांश
केंद्र का कहना है कि मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के लिए अभी राज्य सरकार के खाते में 250 करोड़ से अधिक की राशि उपलब्ध है जो पिछले साल की है। अगली राशि तभी मिलेगी जब इस राशि को खर्च कर लें या तो खाते में 250 करोड़ से कम हो। इस मामले पर केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने नीतीश कुमार पर तंज कसा है। उन्होंने ट्विटर और फेसबुक के जरिए लिखा कि, नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार मध्याह्न भोजन योजना के लिए आवंटित धन के एक महत्वपूर्ण हिस्से का उपयोग करने में विफल रही है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए ₹ 2000करोड़ में से, आश्चर्यजनक रूप से ₹ 250करोड़ अभी भी खर्च नहीं किए गए हैं। यह चिंताजनक स्थिति उन वंचित बच्चों के कल्याण के बारे में गंभीर चिंता पैदा करती है जो अपने बुनियादी पोषण और भरण-पोषण के लिए इन भोजन पर निर्भर हैं।
एक चौंकाने वाले खुलासे में यह बात सामने आई है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार मध्याह्न भोजन योजना के लिए आवंटित धन के एक महत्वपूर्ण हिस्से का उपयोग करने में विफल रही है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए ₹ 2000 करोड़… pic.twitter.com/swjgSgZcVj Shandilya Giriraj Singh (@girirajsinghbjp) July 28, 2023
1 दिन में खर्च होते हैं 8-10 करोड़ रुपये
मध्यान्ह भोजन योजना से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि राज्य में इस योजना के संचालन में प्रतिदिन 8 से 10 करोड़ रुपये का खर्च आता है। ऐसे में अगर प्रतिमाह छुट्टी वाले दिनों को छोड़कर अगर कामकाजी 24 दिन में देखा जाए तो 190 से 200 करोड़ का खर्च आता है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर एक महीने में केंद्र द्वार मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के लिए राशि उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो योजना के संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।