फिल्मफेयर और फेमिना द्वारा सम्मानित किए गए मनोज भावुक, इन भोजपुरी दिग्गजों को भी मिला सम्मान

फेमिना और फिल्मफेयर द्वारा इतना बड़ा सम्मान पाने के बाद मनोज भावुक ने कहा कि भोजपुरी साहित्य और सिनेमा, खासकर इतिहास लेखन के लिए पहली बार किसी फिल्म अवार्ड शो में मुझे सम्मानित किया गया है जबकि दो दशक से भी अधिक समय से मै इस इंडस्ट्री से जुड़ा हूँ और सभी आयोजक व स्टार्स मेरे काम को जानते हैं लेकिन यहाँ कलम की कीमत नहीं है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित रमादा में रविवार (16जुलाई) को फिल्मफेयर एवं फेमिना द्वारा संयुक्त रूप से भोजपुरी आइकॉन्स- रील एंड रीयल स्टार्स समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में भोजपुरी के जाने-माने लेखक, फिल्म समीक्षक और भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार मनोज भावुक सहित भोजपुरी के अन्य दिग्गजों को उनकी श्रेष्ठ कला के लिए सम्मानित किया गया। बता दें कि यह एक ऐतिहासिक कार्यक्रम रहा, जब दो प्रतिष्ठित ब्रांड फिल्मफेयर और फेमिना पहली बार भोजपुरी आइकॉन का सम्मान करने और जश्न मनाने के लिए एकजुट हुए।


भावुक सहित इन दिग्गजों को मिला सम्मान

फिल्मफेयर एवं फेमिना द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पद्मभूषण शारदा सिन्हा को लोक संगीत के लिए, संजय मिश्रा को प्राइड ऑफ भोजपुरी मिट्टी, मनोज तिवारी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड और रवि किशन को ओटीटी और सिनेमा के लिए सम्मानित किया गया। तो वहीं लेखक, फिल्म समीक्षक और भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार मनोज भावुक को भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के इतिहास पर किये गए उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। भावुक को यह सम्मान फेमिना की प्रधान संपादक अंबिका मट्टू व दक्षिण के निर्देशक विक्रम वासुदेव द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।


पहली बार इतिहास लेखन के लिए मिला सम्मान- मनोज

फेमिना और फिल्मफेयर द्वारा इतना बड़ा सम्मान पाने के बाद मनोज भावुक ने कहा कि भोजपुरी साहित्य और सिनेमा, खासकर इतिहास लेखन के लिए पहली बार किसी फिल्म अवार्ड शो में मुझे सम्मानित किया गया है जबकि दो दशक से भी अधिक समय से मै इस इंडस्ट्री से जुड़ा हूँ और सभी आयोजक व स्टार्स मेरे काम को जानते हैं लेकिन यहाँ कलम की कीमत नहीं है। इस दौरान उन्होंने फिल्मफेयर एवं फेमिना को शुक्रिया अदा भी किया और कहा कि यह सम्मान भोजपुरी भाषा व भोजपुरी भाषियों को समर्पित है।


कलम के साथ कैमरा वाला भी हूँ- मनोज भावुक 

भावुक ने कहा कि भोजपुरी इंडस्ट्री फ़िल्म फेयर और फेमिना तक पहुँच गई। यही आपने आप में बड़ी उपलब्धि है। फिल्मफेयर एवं फेमिना द्वारा सम्मान मिलना बड़ी बात है। मैं अपने आप को सौभाग्यशाली समझता हूँ। उन्होंने कहा कि मै तो कलम के साथ कैमरा वाला भी हूँ। भोजपुरी इंडस्ट्री का शायद ही कोई बड़ा कलाकार होगा जिसका मैंने साक्षात्कार नहीं किया हो।


साधारण व्यक्ति नहीं हैं भावुक

बता दें कि बिहार के सिवान जिले के कौसड़ गाँव के रहने वाले मनोज भावुक कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। अभिनय, संचालन एवं पटकथा लेखन आदि विधाओं में उनकी गहरी रुचि है। सौगंध गंगा मईया के और रखवाला नामक फिल्म में मनोज भावुक ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। इसके अलावा बहुत सारे टीवी सीरियल और डॉक्यूमेंटरीज में भी काम किया है। मनोज बिहार आर्ट थियेटर, कालिदास रंगालय, पटना के टॉपर रहे हैं। मेंहदी लगा के रखना नामक एक फिल्म में मनोज का गीत खूब वायरल हुआ - अँचरा छोड़ा के चल काहे दिहले एतना दूर ए माई मनोज ने भोजपुरी के लगभग सभी चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम किया है और विविध विषयों कार्यक्रम बनायें हैं। वे विश्व भोजपुरी सम्मेलन की दिल्ली और इंग्लैंड इकाई के अध्यक्ष रहे हैं। इसके साथ ही कई पुस्तकों के प्रणेता भी हैं। 


कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजे गए हैं भावुक 

मनोज भावुक को भारतीय भाषा परिषद सम्मान (2006), पंडित प्रताप नारायण मिश्र सम्मान (2010), भिखारी ठाकुर सम्मान (2011), राही मासूम रज़ा सम्मान (2012), परिकल्पना लोक भूषण सम्मान, नेपाल (2013 ), अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी गौरव सम्मान, मॉरिशस (2014), गीतांजलि साहित्य एवं संस्कृति सम्मान, बर्मिंघम, यूके (2018 ), बिहारी कनेक्ट ग्लोबल सम्मान, दुबई (2019 ), कैलाश गौतम काव्यकुंभ लोकभाषा सम्मान (2022) जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

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