पटना: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमनके इस्तीफे के बादशुक्रवार (16 जून) को यानी आज जेडीयू विधायक रत्नेश सदा को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। रत्नेश सदा ने आज नीतीश कैबिनेट में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री पद का शपथ ग्रहण किया। राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने पटना के राजभवन में सदा को शपथ दिलाई। सतोष कुमार के इस्तीफे के बाद से ही इस मुद्दे पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयानों का इंतजार था। जो आज शपथ ग्रहण समारोह के बाद सामने आया है। बिहार सीएम ने कहा कि जीतन राम मांझी भाजपा से मिले हुए थे और हमारी बातें वहां तक पहुंचाते थे।
मैंने उनके लिए सीएम पद छोड़ा- नीतीश कुमार
नीतीश कुमार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पर एक तरह से जासूसी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हमने उनके लिए क्या नहीं किया? कोई किसी के लिए अपना मुख्यमंत्री का पद नहीं छोड़ता। लेकिन मैंने उनके लिए 2014 में अपना छोड़कर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि पार्टी का कोई भी नेता नहीं चाहता कि मैं सीएम पद से रिजाइन दूं। उन्होंने कहा कि मैं सब जानता था कि वो बीजेपी से मिलते थे और हमारी मीटिंग की सारी बात बताते थे।
दूसरे विकल्प चुने मांझी- नीतीश कुमार
नीतीश कुमार ने आगे कहा कि मांझी खुद बोले थे कि विपक्ष की मीटिंग में मैं रहूंगा। पार्टी का जेडीयू में विलय करने की बात पर सीएम ने कहा कि जब मेरे पास वो मिलने के लिए आए तो हमने कहा कि हमने आपको इतना आगे बढ़ाया है। आप अपनी पार्टी HAM को या तो हमारी पार्टी में विलय कर दीजिए या तो आप अलग हो जाइए। लेकिन उन्होंने मेरे दिए गए दूसरे विकल्प को चुना और अलग हो गए, तो कोई बात नहीं ठीक ही हुआ।
23 तारीख को है सभी दलों की बैठक
बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका अलग होना जरूरी ही था। क्योंकि 23 तारीख को सभी दलों की बैठक है और अगर ये होते तो हमारे बीच जो भी बात होती वो सब बीजेपी तक पहुंच जाती। इसीलिए अच्छा हुआ जो वो अलग ही हो गए। हमने तो अपनी तरफ से उन्हें सीएम बनाया था। रत्नेश की शपथ ग्रहण को लेकर उन्होंने कहा कि हमे पता है कि रत्नेश सदा काबिल हैं और अच्छा काम करेंगे। बता दें कि रत्नेश सदा सहरसा के सोनबरसा से तीसरी बार के विधायक हैं।