नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज अपना 44वां स्थापना दिवस मना रही है। पार्टी की स्थापना आज ही के दिन यानी 6 अप्रैल सन् 1980 को हुई थी। इस मौके पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय प्रकाश (जेपी) नड्डा ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय परझंडा फहराया। इस दौरान पीएम मोदी से लेकर पार्टी के सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे। ध्वजारोहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअलीदेशभर के सभीबीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीजेपी के लिएजो सर्वोपरि है वो है राष्ट्र । उन्होंने कहा कि जब जनसंघ का जन्म हुआ था तो हमारे पास न ज्यादा सियासी अनुभव था, न साधन थे… न संसाधन थे लेकिन हमारे पास मातृभूमि के प्रति भक्ति और लोकतंत्र की शक्तिथी इसीलिए आजभाजपा सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के साथ काम कर रही है। बीजेपी की नीति सर्वजन का हित करने वाली है।
इस दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर परिवारवाद और वंशवाद को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।उन्होंने कहा, जब हनुमान जी को राक्षसों का सामना करना पड़ा था तो वो उतने ही कठोर भी हो गए थे। इसी प्रकार से जब भ्रष्टाचार की बात आती है, जब परिवारवाद की बात आती है, कानून व्यवस्था की बात आती है तो भाजपा उतनी ही संकल्पबद्ध हो जाती है।
कैसे हुआ था भाजपा का जन्म
आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी को पहले भारतीय जनसंघ के नाम से जाना जाता था जिसकी स्थापना अक्टूबर सन् 1951 में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने किया था। श्यामा प्रसाद आजाद भारत की पहली कैबिनेट का हिस्सा थे। सन् 1952 में भारत में पहले आम चुनाव (लोकसभा) हुए। इस चुनाव में भारतीय जनसंघ ने हिस्सा लिया और तीन सीटें जीतीं। जनसंघ का रिक्गनाइज्ड राष्ट्रीय पार्टी के रूप में प्रकाशित हुआ।
सन् 1957 के दूसरे लोकसभा चुनाव में भी भारतीय जनसंघ ने भागीदारी की। इस चुनाव में बीजेएस को 5 सीटें मिलीं। इस बार अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार सांसद बने।1962 में तीसरे लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में जनसंघ को बड़ी बढ़त मिली और पार्टी ने 14 सीटों पर जीत दर्ज की।1967 के लोकसभा चुनाव में जनसंघ ने एक बार फिर बड़ी छलांग लगाई। इस बार पार्टी के 32 सांसद जीतकर आए। चुनाव के एक साल बाद 1968 में जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का निधन हो गया। इसके बाद 1969 में अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष चुने गए।
1973 में पार्टी की कमान लाल कृष्ण आडवाणी को मिली। इंदिरा गांधी के आपातकाल के फैसले के खिलाफ कई लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी राजनीतिक दल एक साथ आ गए। भारतीय जनसंघ और दूसरे कई दलों के इस महागठबंधन को जनता पार्टी का नाम दिया गया।
1977 में छठवीं लोकसभा के लिए चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस और इंदिरा गांधी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ाऔर जनता पार्टी को 302 सीटें मिलीं। इस दौरान मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। जबकि अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने और लाल कृष्ण आडवाणी को सूचना एवं प्रसारण मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
महागठबंधन का ये फॉर्मूला एक कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाया और आंतरिक कलह के चलते 30 महीनों के भीतर ही जनता पार्टी का विघटन हो गया। कई पार्टियों ने समर्थन वापस ले लिया। मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जून, 1979 में चौधरी चरण सिंह ने पीएम पद की शपथ ली। कांग्रेस ने चरण सिंह को समर्थन का वादा किया लेकिन सदन में बहुमत साबित करने से पहले ही कांग्रेस मुकर गई। नतीजा ये हुआ कि जनवरी,1980 में फिर से चुनाव कराए गए।
1980 का लोकसभा चुनाव भारतीय जनसंघ ने जनता पार्टी के नाम पर ही लड़ा। जबकि चौधरी चरण सिंह ने जनता पार्टी (एस) पार्टी के नाम पर चुनाव लड़ा। जनसंघ के साथ जनता पार्टी को महज 31 सीटों पर जीत मिली। कांग्रेस ने 353 सीटों के साथ सरकार बनाई।
सातवीं लोकसभा की करारी हार ने बीजेपी को जन्म दिया। 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया।