Marigold Farming: अप्रैल महीने में महक रही गेंदे की फ्लॉवर वैली, किसानों को दोगुना लाभ, देशभर में हो रही 50 फीसदी सप्लाई

Marigold Farming: देशभर में इस समय रबी फसल बेमौसम बारिश से खराब हो रही है। किसानों की स्थिति काफी दयनीय है। बारिश और तेज हवा चलने के कारण गेहूं और सरसों की फसल खेतों में बिछ गई। जिससे फसल के उत्पादन और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। किसान बर्बाद फसलों को देखकर कराह रहा है।

ऐसे में बदलते मौसम के कुचक्र से गेंदे की फूल की फसल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। हमारे भारत में गेंदे फूलों की खेती का एक अलग ही महत्व है। गेंदा का फूल त्योहारों दशहरा, नवरात्रिऔरदीपावली पर काफी प्रयोग में लाया जाता है। इसके अलावा शादी ब्याह और घरों की सजावट में इसका काफी प्रयोग होता है।

बता दे कि अप्रैल महीने में बीते दिनों की तुलना में गेंदे के फूल की खरीददारी बढ़ी है। इस समय बेमौसम बरसात से गेंदे की फसल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। जिससे किसान ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। रबी की फसल में हानि होने के बाद किसानों का रूझान गेंदे की फसल की ओर बढ़ा है।

वहीं, पश्चिम बंगाल में फूल सस्ते होने के बाद भी त्योहार के लिए खरीदे जाते हैं। कोलकाता से गेंदे के फूलों को चार से पांच गुने कीमत पर बेचा जाता है। एक फूल की कीमत 40की बजाए 120से 200रुपए तक मिल जाता है। जिससे किसानों को काफी लाभ होता है।

बिहार के बोधगया में चल रही पूजा को लेकर मुख्य मंदिर के लिए 200किलो फूल कोलकाता से मंगाए गए हैं। बोधगया में पूजा को लेकर विदेशों से भी फूल मंगाए जाते हैं। वहीं और फूलों की आवश्यकता स्थानीय स्तर से पूरी की जाती है।बिहार के गया मंडी में हावड़ा मंडी से फूल पहुंचते हैं। किसानों को कोलकाता के हाईब्रिड गेंदे की फूल से कड़ी टक्कर मिलती है।

जानकारी के लिए बता दे कि गेंदे के फूल की खेती वर्षभर की जा सकती है। गेंदा की खेती के दौरान करीब 15से 29डिग्री सेल्सियसतापमान होना चाहिए। तभी किसान आसानी से कम रुपये में गेंदा की फूलों के खेती से मुनाफा हासिल कर सकते हैं। इस समय गेंदे की खेती के लिए मौसम अनुकूल है और किसानों को लाभ मिल रहा है।

गौरतलब है कि फरवरी में पहले सप्ताह के बाद और जुलाई में पहले सप्ताह से पहले अफ्रीकी गेंदा लगाने से अच्छी पैदावार होती है। लेकिन सबसे ज्यादा पैदावार सितंबर में लगाए गए गेंदे से होती है। गेंदे की फसल की सबसे खास बात यह है कि इसकी खेती कम जगह पर भी आसानी से की जा सकती है।

अगर किसान के पास एक हेक्टेयर जमीन है तो किसान एक साल में करीब 15से 20लाख रुपए की कमाई कर सकते हैं। हमारा देश फल और सब्जी के बीजों को दूसरे देशों में भेजता हैऔर वर्ष 2012-13के दौरान 410.53करोड़ रुपए का निर्यात किया गया। पाकिस्तान, अमेरिका, बांग्लादेश, नीदरलैंड, इटली, थाईलैंड जैसे देश भारत के फल और सब्जी की बीज के मुख्य बाजार रहे हैं।

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