आखिर घाटी में क्यों की जा रही है टारगेट किलिंग, संजय शर्मा को नम आंखों दी अंतिम विदाई

श्रीनगर: रविवार को कश्मीर के पुलवामा में फिर से टारगेट किलिंग देखने को मिली। इस हमले में कश्मीरी पंडित संजय शर्मा जी की मौत हो गई। आज संजय शर्मा का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग इकठा हुए। क्षेत्र में पुलिस और सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बीच उन्हें अंतिम विदाई दी गई। अंतिम यात्रा में शामिल हर शख्स में की आंखों में आंसू देखे गए।

रविवार को की गई हत्या

रविवार को आतंकियों ने संजय शर्मा पर हमला किया था। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। घाटी में अक्तूबर के बाद एक बार फिर टारगेट किलिंग को अंजाम दिया गया। उनकी हत्या के बाद से ही अच्छन क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। इस घटना की स्थानीय मुस्लिम लोगों ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि हत्यारे किसी जानवर से कम नहीं हैं, जिन्होंने हमारे कश्मीरी पंडित भाई को हमसे छीन लिया है। मृतक गार्ड अपने पीछे पत्नी व दो मासूम बेटियां व एक बेटे को छोड़ गया है।

18 से ज्यादा पंडितों को मारा

कश्मीर के पुलवामा में आज एक कश्मीरी पंडित की आतंकियों द्वारा की गई हत्या के साथ कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आतंकियों के हाथों मारे गए कश्मीरी पंडितों की संख्या 18 हो गई है। इसी अरसे में आतंकियों ने हिन्दुओं, सिखों और प्रवासी नागरिकों को भी नहीं बख्शा है।

2017 से लेकर अब तक कितने मारे गए

इस साल वर्ष 2017 से लेकर अभी तक 45 अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को आतंकी मार चुके हैं। कइयों को जख्मी भी किया जा चुका है। सबसे ज्यादा कश्मीरी पंडित वर्ष 2021 में मारे गए थे। वर्ष 2021 में ही आतंकियों ने कई प्रवासी नागरिकों को मार डाला।

बुरहान बानी की मौत के बाद भी ऐसा ही हुआ

आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में हालात सुधरते नहीं दिख रहे थे। आतंकी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम ने पुलवामा में कई जगह पोस्टर लगाए थे। जिसमें कहा गया था कि कश्मीरी पंडित या तो घाटी छोड़ दें या फिर मरने के लिए तैयार रहें। बता दें कि कश्मीर में साल 1990में हथियारबंद आंदोलन शुरू होने के बाद से अब तक लाखों कश्मीरी पंडित अपना घर-बार छोड़ कर चले गए थे, उस वक्त हुए नरसंहार में सैकड़ों पंडितों का कत्लेआम हुआ था।

आखिर क्या है कारण

अगर इस मामले पर दीर्घ विश्लेषण करें तो इस टारगेट किलिंग के पीछे का कारण एक तरफ तो पाकिस्तान है लेकिन इसमें कुछ कश्मीर के स्थानीय लोग भी शामिल रहें हैं। बताया जाता है कि 90 के दशक में जो कश्मीरी हिन्दू घाटी छोड़ कर गए तो यहाँ के लोगों ने उनकी जमीनों घरों और पैसों पर अवैध कब्जा कर लिया। ऐसा चर्चा में है कि शायद इन लोगों में डर है कि कहीं यह हिन्दू वापस घाटी में आकर अपनी जमीन को वापस न मांग लें। ऐसे में सकरात्मक हालात ना बनें इसके लिए ऐसा किया जा रहा है।

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