नई दिल्ली: देश में फिर जेएनयू और जामिया मिलिया विशवविद्यालय चर्चा का विषय बने हुए हैं। आज इन दोनों यूनिवर्सिटी में बीबीसी पर बनी डाक्यूमेंट्री का जेएमआई में आज शाम 6 बजे डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की जाने वाली है। ऐसे में फिर दोनों यूनिवर्सिटी चर्चा में आ गई हैं।
4 को हिरासत में लिया
यूनिवर्सिटी में एसएफआई द्वारा आज शाम 6 बजे डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का ऐलान करने के बाद दिल्ली पुलिस ने 4 छात्रों को हिरासत में ले लिया है। जानकारी के अनुसार, जामिया यूनिवर्सिटी के बाहर अशांति फैला रहे 4 छात्रों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर के कहने पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की है।
जेएनयू में भी हो चूका है विवाद
पीएम मोदी पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर कल जेएनयू में भी भारी बवाल हुआ। JNUSU ने डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर कैंपस में पर्चे लगा दिए थे, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नोटिस जारी कर डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद भी छात्रों ने स्क्रीनिंग का आयोजन किया।
ABVP ने SFI पर लगाए हैं आरोप
सोमवार देर शाम स्क्रीनिंग के लिए इकट्ठा हुए JNUSU के छात्रों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कैंपस में बिजली काट दी जिसके चलते डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग नहीं हो सकी और उनपर दूसरे छात्र संघ ने पथराव भी किया। कुछ छात्रों ने कहा कि ABVP के छात्रों ने स्क्रीनिंग के विरोध में स्टूडेंट्स पर पथराव किया। वहीं इस मामले पर ABVP का कहना है कि SFI छात्रों ने कैंपस के संस्कृत विभाग पर हमला किया और छात्रों को निशाना बनाया।
सुरक्षा को लेकर वसंत कुंज थाने तक किया मार्च
देर रात जेएनयू छात्रों ने अपनी सुरक्षा को लेकर वसंत कुंज थाने में शिकायत देने के लिए मार्च किया। आइसा जेएनयू इकाई अध्यक्ष कासिम ने बताया कि जब स्क्रीनिंग चल रही थी तो हम पर पथराव हुआ। हम लोग शांतिपूर्वक मार्च करते हुए मैन गेट तक आए।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री जाहिर कर चुके हैं असहमति
इस डाक्यूमेंट्री को विदेश मंत्रालय पहले ही औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित और गुमराह करने वाला बता चुका है। सूचना व प्रसारण मंत्रालय डाक्यूमेंट्री के लिंक साझा करने वाले सभी यूट्यूब वीडियो और ट्विटर पोस्टों को ब्लाक करने का निर्देश जारी कर चुका है। वहीं, डाक्यूमेंट्री से ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक भी असहमति जाहिर कर चुके हैं। सुनक ने पिछले दिनों कहा था, निश्चित रूप से हम उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करते हैं, चाहे यह कहीं भी हो, लेकिन मैं उस चरित्र-चित्रण से कतई सहमत सहमत नहीं हूं जो माननीय नेता का दिखाया गया है।
यह है पूरा मामला
जेएनयू प्रशासन की सख्त चेतावनी के बावजूद वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्रों ने छात्र संघ कार्यालय पर एकत्र होकर 2002 के गुजरात दंगों पर बनी इंडिया : द मोदी क्वेश्चन नामक बीबीसी की डाक्यूमेंट्री देखी। छात्र प्रोजेक्टर पर डाक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग न कर सकें, इसके लिए जेएनयू प्रशासन ने कार्यालय के आसपास की बिजली कटवा दी और जैमर लगवाकर इंटरनेट सेवाएं बाधित करा दी। इसके बावजूद वहां मौजूद छात्रों ने फोन व लैपटाप में पहले से डाउनलोड डाक्यूमेंट्री सामूहिक तौर पर देखी।