चंडीगढ़: हरियाणा और पंजाब सरकार में लम्बे समय से चल रहे सतलुज-यमुना लिंक विवाद पर कल दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री से मुलाक़ात कर सकते हैं। दरअसल यह मीटिंग केंद्रीय जल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुलाई है। दरअसल इस मामले को लेकर 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
3 बजे होगी यह बैठक
यह बैठक बुधवार को दोपहर 3 बजे दिल्ली में होगी। बैठक में हिस्सा लेने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल मंगलवार शाम को ही दिल्ली पहुंच जाएंगे। 5दिसंबर को भी सीएम दिल्ली में ही रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल कई अहम बैठकों में शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की हो चुकी है अवमानना
सर्वोच्च न्यायालय के दो फैसलों के बावजूद पंजाब ने एसवाईएल का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों को लागू करने की बजाए पंजाब ने साल 2004में समझौता निरस्तीकरण अधिनियम बनाकर इनके क्रियान्वयन में रोड़ा अटकाने का प्रयास किया।
यह पूरा मामला
पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधान के अंतर्गत भारत सरकार के 24 मार्च, 1976 को जारी आदेश के अनुसार हरियाणा को रावी-ब्यास के फालतू पानी में से 3.5 एमएएफ जल का आबंटन किया गया था। एसवाईएल कैनाल का निर्माण कार्य पूरा न होने की वजह से हरियाणा केवल 1.62 एमएएफ पानी का इस्तेमाल कर रहा है। पंजाब अपने क्षेत्र में एसवाईएल कैनाल का निर्माण कार्य पूरा न करके हरियाणा के हिस्से के लगभग 1.9एमएएफ जल का गैर-कानूनी ढंग से उपयोग कर रहा है।
यह होगा इसका निर्माण होने पर फायदा
पंजाब के इस रवैये के कारण हरियाणा अपने हिस्से का 1.88 एम.ए.एफ. पानी नहीं ले पा रहा है। पंजाब और राजस्थान हर वर्ष हरियाणा के लगभग 2600 क्यूसेक पानी का प्रयोग कर रहे हैं। यदि यह पानी हरियाणा में आता तो 10.08 लाख एकड़ भूमि सिंचित होती, प्रदेश की प्यास बुझेगी और लाखों किसानों को इसका लाभ मिलेगा। इस पानी के न मिलने से दक्षिण-हरियाणा में भूजल स्तर भी काफी नीचे जा चुका है।