नई दिल्ली: अफगानिस्तान और पकिस्तान के सीमा विवाद में सम्बन्ध बिगड़ते जा रहे हैं। सीमा विवाद का कारण टीटीपी को बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार टीटीपी को अफगनिस्तान की तालिबानी सरकार का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में अफगानिस्तान के एक मंत्री ने पाकिस्तान को धमकी दी है कि अगर वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आये तो 1971 वाला हाल कर देंगे।
د پاکستان داخله وزیر ته !
عالي جنابه! افغانستان سوريه او پاکستان ترکیه نده چې کردان په سوریه کې په نښه کړي.
دا افغانستان دى د مغرورو امپراتوريو هديره.
په مونږ دنظامي يرغل سوچ مه کړه کنه دهند سره دکړې نظامي معاهدې د شرم تکرار به وي داخاوره مالک لري هغه چې ستا بادار يې په ګونډو کړ. pic.twitter.com/FFu8DyBgio
Ahmad Yasir (@AhmadYasir711) January 2, 2023
अहमद यासिर ने किया ट्वीट
तालिबान के एक अधिकारी अहमद यासिर ने ट्वीट कर पाकिस्तान को 1971 युद्ध की याद दिला दी। यासिर ने कहा है कि अगर पाकिस्तान, अफगानिस्तान पर हमला करता है तो इससे 1971 की लड़ाई दोहराई जाएगी। यासिर ने पाकिस्तान की गीदड़ भभकी पर उसे आईना दिखाते हुए 16 दिसंबर 1971 की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए कहा है कि पाकिस्तानी सेना को एक और युद्ध हारने से बचने के लिए अफगानिस्तान से दूर रहना चाहिए।
1971 में हुआ था बांग्लादेश का जन्म
16दिसंबर 1971 की इस तस्वीर में ईस्ट पाकिस्तान के चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेशन और पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आमिर अब्दुल्लाह खान नियाजी ने सरेंडर दस्तावेजों पर साइन किए थे। तालिबान की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के गृहमंत्री राना सनाउल्ला की उस चेतावनी के बाद आया है, जब उन्होंने अफगानिस्तान में टीटीपी के ठिकानों पर हमले की चेतावनी दी थी।
पाकिस्तान ने लगाया अफगानिस्तान पर यह आरोप
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार का आरोप है कि अफगानिस्तान टीटीपी आतंकवादियों को शरण दे रहा है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में घुसकर टीटीपी का सफाया करने की भी चेतावनी दी थी।