श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद: शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में मथुरा की कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। मथुरा के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने शाही ईदगाह के सर्वे का आदेश दिया और 20 जनवरी 2023 तक रिपोर्ट जमा करने आदेश दिया है। हिंदू पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन (तृतीय) की अदालत ने अमीन को मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद के विवादित स्थल का सर्वे करने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि,श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित एक अन्य मामले में वादी एडवोकेट महेंद्र सिंह ने जानकारी दी है कि कोर्ट ने अमीन से तीन दिन में अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। वादी विष्णु गुप्ता ने 13.37 एकड़ जमीन मुक्त कराने की मांग की है। कोर्ट के आदेश को हिंदू पक्ष अपनी जीत बता रहा है।
वहीं, सर्वें संवंधित यह ध्यान दिया जा सकता है कि यह आदेश उसी तर्ज पर है जैसे वाराणसी की एक अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद के वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का आदेश दिया था। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है। 8 दिसंबर को हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता और दिल्ली निवासी उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह यादव ने अदालत में दावा किया था कि ईदगाह का निर्माण तत्कालीन मुगल बादशाह औरंगजेब ने भगवान कृष्ण की जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन पर बने मंदिर को तोड़कर किया था।
आपको बता दें कि, याचिका में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के बीच वर्ष 1968 में हुए समझौते को भी चुनौती दी गई। विशेष याचिका हिंदू संगठनों द्वारा कटरा केशव देव मंदिर से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग करने वाली कई याचिकाओं में से एक है, जिसमें दावा किया गया कि मस्जिद भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर बनाई गई है।
यह ध्यान दिया जा सकता है कि मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद, पूजा के स्थान अधिनियम, 1991 के दायरे में आती है। यहां कानून क्या कहता है, किसी भी पूजा स्थल के परिवर्तन पर रोक लगाने और रखरखाव के लिए प्रदान करने के लिए एक अधिनियम किसी भी पूजा स्थल का धार्मिक स्वरूप, जैसा कि वह 15 अगस्त, 1947 को अस्तित्व में थाऔर उससे जुड़े या उसके आनुषंगिक मामलों के लिए।