छोटे कस्बे से उठ गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा ने रौशन किया देश का नाम…दुनिया भर में छोड़ी अपनी एक अलग छाप

साल 2022 समाप्ति की तरफ बढ़ रहा है और हम नव वर्ष की दहलीज पर खड़े हैं। मात्र 15 दिन शेष हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम पूरे वर्ष का लेखा जोखा प्रस्तुत करें ताकि सुधी पाठक अवगत हो सकें जो समय गुजरा उनमें हमारे लिए क्या खास था? हमने क्या पाया और हमारी उप​लब्धियां क्या रहीं? इसी क्रम में सूर्या समाचार आगामी 15 दिन तक एक सीरिज शुरू कर रहा है जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की उपलब्धियों, प्रमुख घटनाओं का लेखा जोखा प्रस्तुत किया जाएगा। हमारी कोशिश होगी कि इस सीरिज के जरिए शिक्षा, खेल, साहित्य, मनोरंजन, विज्ञान, समेत अन्य क्षेत्रों में भारत का गौरव बढ़ाने वाले शख्सियतों के विषय में तो बतायें ही साथ ही इस दौरान हासिल की गई उपलब्धियों को भी रेखांकित करें। तो आईये इस सीरिज की पहली कड़ी में आपको रूबरू कराते हैं गोल्डेन मैन नीरज चोपड़ा से…..

चंडीगढ़: देश भर में गोल्डन बॉय के नाम से पहचान बना चुके हरियाणा के नीरज चोपड़ा को शायद ही कोई ऐसा हो जो ना जानता हो। बच्चों से लेकर युवाओं तक के प्रेरणा बन चुके नीरज चोपड़ा आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। जैवलिन थ्रो में अपने शानदार प्रदर्शन से नीरज चोपड़ा ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। कहीं न कहीं हम यूं भी कह सकते है कि जैवलिन थ्रो को भारत में असली पहचान नीरज चेपड़ा के बाद से ही मिली है। इससे पहले इक्के-दुक्के लोग ही जैवलिन थ्रो खेल के बारे में जानते थे। कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले नीरज चेपड़ा ने इस मुकाम तक आने के लिए जी-तोड़ मेहनत की है।

पहली बार ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत आए नीरज सुर्खियों में

साल 2021 में टोक्यो में खेले गए ओलंपिक गेम्स में नीरज द्वारा खेले गए शानदार प्रदर्शन ने उन्हें एक अलग पहचान मिली। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतककर नीरज दुनिया भर में गोल्डन बॉय के नाम से मशहूर हुए। नीरज ने 87.58 मीटर दूर भाला फेंक एक नया रिकोर्ड बनाया। वहीं 100 साल बाद नीरज ने ट्रेक एंड फील्ड में मेडल जीत भारत का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवाया। इस जीत के बाद नीरज की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। अखबारों से लेकर समाचार चैनलों तक हर तरफ नीरज की जीत के ही चर्चा होने लगे। इस जीत से नीरज को सेलिब्रेटियों से भी बढ़कर पहचान मिली। यह अंत नहीं बल्कि यहीं से तो नीरज के करियर की शुरूआत हुई। इसके बाद नीरज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले गए गेम्स में कई ब्रोन्ज और गोल्ड मेडल हासिल किए, और यह सिलसिला अभी भी जारी है।

कैसा बीता नीरज का बचपन

नीरज चोपड़ा की बात करें तो वह हरियाणा के पानीपत जिले के छोटे से गांव खंडरा के रहने वाले है। नीरज एक किसान परिवार से संबंध रखते है। उनके पिता किसान है। वहीं उनकी माता गृहिणी है। नीरज की दो बहने है। अपने दिए इंटरव्यू में नीरज ने बताया कि उनका पढ़ाई में कुछ खास मन नहीं लगता था, और कहीं न कहीं पढ़ने से बचने के लिए ही उन्होंने खेलना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनकों खेलने में रूचि आने लगी। और उन्होंने इस लाइन में अपना करियर बनाने का फैसला लिया। जिसमें उनके घरवालों ने भी उनका पूरा-पूरा सहयोग किया।

आज करोड़ों में है नीरज चोपड़ा की ब्रान्ड वेल्यू

जैवलिन स्टार नीरज चोपड़ा की ब्रान्ड वैल्यू आज करोड़ो में है। बड़ी- बड़ी कंपनियां अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करने के लिए नीरज चोपड़ा को ब्रांड एंबेसडर बना रही है। टाटा, लिमका, गुडडॉट जैसी कई बड़ी-बड़ी कंपनियां नीरज को हायर कर चुकी है।

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